शैतान चुहिया | SHAITAN CHUHIYA

SHAITAN CHUHIYA by विजय दान देथा

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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'ज्व |बिलकुल ही मना कर दिया। बोली--मुझे मिली है रोटी, तुझे क्‍्यों। 5 दूं। तब चिड़िया ने कहा-मैंने तुझे झरने से डूबती हुई को बचाया। ६ #(|था न, इतनी जल्दी भूल गई। चुहिया बोली-मुझे बचाया री क्‍यों 2. (6 | बचाया, मैं तो हर हर गंगा नहा रही थी। 9 हि न तब चिड़िया ने कहा-मैंने तुझे बेर के कांटों से बचाया था न, | है न | इतनी जल्दी भूल गई। चुहिया बोली मुझे री क्‍यों बचाया री क्‍यों | 95 धुत बचाया, मैं तो कच कच कान छिदवा रही थी। तब चिड़िया ने।ह 4 | कहा-क्यों री, मैंने तुझे भेंस के पोटे से दबती हुई को निकाला था स्ञ 3 (८ ५| न, इतनी जल्दी भूल गई। चुहिया बोली-मुझे क्‍यों बचाया री क्यों | «६ | बचाया, मैं तो अपनी कमर खुंदवा रही थी। । 22 26 तबचिड़िया ने कहा-मैंने तुझे ऊंट के पैर से मरती को बचाया। £८- 6- 3 अबू के था न, इतनी जल्दी भूल गई। चुहिया बोली-मुझे क्‍यों बचाया री।॥& 9 * क्यों बचाया, मैं तो कट-कट चनक निकलवा रही थी। चिड़िया ने व सब तरह से समझाना चाहा, किन्तु शैतान चुहिया नहीं मानी। कुटच्डः | कुट करती अकेली ही सारी रोटी खा गई। चिड़िया को एक भी नहीं 2! जो जाते जाते वे दोनों एक बामन के खेत पर पहुंची। बामन अपने।9%. जन |खेत में ज्वार काट रहा था। उसने एक बड़ा भारा बांधकर उठाया। | 9). “जे |घर की ओर जाने लगा तो चुहिया बोली-चलो अपन इसके घर चले | | कषि> तब चिड़िया ने कहा-मैं अब तेरे साथ कहीं नहीं चलने की। यहीं | )) म(|द्धेत में ठहरूंगी। ज्वार का चुग्गा चुगूंगी। बच्चों को संभालूंगी। तेरी | 5: शैतानी तू भुगत। पर चुहिया तो बेहद चंचल थी। कुछ न कुछ शैतानी 7६ 7




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