तीन बच्चे | TEEN BACHCHE
श्रेणी : बाल पुस्तकें / Children

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
10
श्रेणी :
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पुस्तक समूह - Pustak Samuh
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)क्क्के के के का के के कि को कि के के क क को कि
मेरे साथ चलेगी तो तेरी अम्माँ लड़ेगी
हम लोगों की हँसी अब दबाये न दबी | अम्मां के लड़ने की बात सुनते ही |
1 बड़ी ने फिर जमीन से माथा टेककर कहा -- कुछ भी खाने को चाहिए | |
धर्म - जहान कक की कान जे मे आर ओ की हक हे
चली गयी। 1 9
५ मय हे दितनी पूरिया दी, यह तो मैं नहीं कह सकती, पर जब चोके ॥)«/ |
| में जाकर देखा तो न डिब्बे में एक भी पूरी थी और न कटोरे में तरकारी। | ९६
19) 8॥
दूसरे दिन हम लोग सुबह की चाय पीकर उठने ही वाले थे वे बाल गवैये
६ ॥ फिर आ पहुँचे। हमें, कोमल स्वर में सुनाई पड़ा --
'साँवरिया हमें भूल गयो, सखि, साँवरिया
बिंदराबन की कुझगलिन में बाज रही है बासुरिया।।
हमें भूल गयो, सखि साँवरिया | । दे
:>)1 मेने अपने बच्चों से कहा -- कल तुमने इन्हें खूब पूरियाँ खिलायी थीं न। ४:
)॥ अब वे सब फिर आ गये। जैसे उनके लिए ग्रहाँ रोज पूरियाँ धरी हैं ५
८ “ धरीतो हैं माँ! एक साथ ही बच्चों के मुँह से निकला ओर सबके हाथ (“|
एक साथ ही पूरी के डिब्बे की ओर बढ़े 1
रोकते हुए कहा -- ठहरो, ठहरो! रोज-रोज इन्हें पूरियाँ खिलाओगे ६
1 तो वे दरवाजा ही न छोड़ेंगे। उन्हें चावल या आटा देकर जाने को कह दो । हि
/) एक बच्चा बोल उठा -- बेचारे छोटे-छोटे बच्चे; न जाने उनके माँ भी है ०) |
॥ या नहीं। वे भला कहाँ पकायेंगे? बंध |
2४
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