तेरे रस्ते में गड्ढा | TERE RASTE MEIN GADHDHA
श्रेणी : बाल पुस्तकें / Children

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
16
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पुस्तक समूह - Pustak Samuh
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)_-ह आयी। उसका कूबड़ कापने लगा। 1
“४. कुम्हार और गुलजान ने प्यार-भरी आवाज में कहा :“अजनबी! हमें '7 अपना नाम बता दो ताकि हमें मालम हो जाय कि हम किसके लिए
| दुआ करें।”
5-8 सृदखोर तुतलाया :“हां, मुझे अपना नाम बता दे, ताकि मुझे मालूम ;॥हो जाय कि किसके लिए बददुआ करूं।” कु४, ॥ खोजा नसरुद्दीन' का चेहरा चमक रहा था। उसने साफ और ऊची ॥8/(५
॥ आवाज में कहा :“बगदाद ओर तेहरान में, इस्ताम्बूल और बुखारा में, £-ह५ ॥ हर जगह में एक ही नाम से जाना जाता हूं और वह नाम है-खोजा हमे
201 नसरुद्दीन।” कु
पक 1. सूदखोर डर के मारे सफेद पड़ गया और पीछे को हटता हुआ #*
५ //॥ बोला: “खोजा नसरुद्दीन ?” और अपने कूली को आगे खदेड़ता हुआ #.दर, क् व पक
५ बडच् ' पा७६ ॥ वह डर के मारे भागने लगा। े हनन
“8. जहा तक और लोगों का ताल्लुक था, वे उसका इस्तकबाल करते _ गो
ही ४ हुए ः नसरुद्दीन !” नकाब के नीचे ;+ करबकषैध्रोजा नसरुद्दीन | नगुलजान की आखें चमक उठी। बूढ़ा कुम्हार अभी तक अपने होश 4७ ९दुरस्त नहीं कर पाया था। वह हवा में हाथ हिलाता रहा और कुछ /
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