जिस रात पलंग गिर गया | JIS RAAT PALANG GIR GAYA
श्रेणी : बाल पुस्तकें / Children

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
724 KB
कुल पष्ठ :
16
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भारत
ज्ञान
विज्ञान
समिति
इस असंभव -सी लगने वाली घटना का माहौल
बनाने के लिए जरूरी है कि फर्नीचर को यहां - वहां
फेंका जाए, दरवाजे खड़काए जाएं, क॒त्ते की तरह
भोंका जाए “ पलंग क्या गिरा कि घर में
चीरब-चिल्लाहट शुरू हो गई, घर के लोग
तरह-तरह की आशंकाओं से घिर गए और
अफरा - तफरी मच गई। मां को लगा कि पिताजी
परलोक सिधार गए। तनन््मय को लगा कि उसका दम
घुट रहा है '” पर असल में हुआ क्या था ? पढ़िए इस
कहानी में।
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