भाग्य रेखा | BHAGYA REKHA

BHAGYA REKHA by अरविन्द गुप्ता - Arvind Guptaभीष्म साहनी - Bhisham Sahni

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भीष्म साहनी - Bhisham Sahni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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| है, रहा था। हि ““'लाग-लपेट वाली बात नहीं करो, जो हाथ में लिखा है, वही। $ ड पढो |” कं 2). | 28 “इधर अंगूठे के नीचे भी तिकोन बनती है। तेरा माथा बहुत साफ |. ४ 1. 1 |है,धनजरूरमिलेगा ।'' । ४.४. “कब? '' पी शा “जल्दी ही।” देखते ही देखते उसने ज्योतिषी के गाल पर एक ९ 7 ३ 5 | हऋ%- थप्पड़ दे मारा। ज्योतिषी तिलमिला गया। 10% धर पं कब धन मिलेगा? धन मिलेगा। तीन साल से भाई के टुकड़ों पर - . शिक्ष| पड़ा हूं। कहता है, धन मिलेगा।' 0: 1 उठाकर जाने लगा, मगर यजमान ने (६-# (578. मीठी-मीठी बातें तो बता दीं, अब जो लिखा है वह बता, मैं कछ 9 हे | (| नहीं कहूंगा।”” ६#( । | ः ज्योतिषी कोई बीस-बाईस वर्ष का युवक था ! काला चेहरा, सफंद ॥ ॥ | '( | र ॥ 0) ४ कुर्त्ता और पाजामा जो जगह-जगह सिला हुआ था। बातचीत के ढंग ही है. ै | बी से बगाली जान पड़ता था। पहले तो घबसाया फिर हथेली पर-यजमान |, ६ ही | _/| का हाथ लेकर रेखाओं की मूक भाषा पढ़ता रहा। फिर धीरे से बोला: बि्ँ: । एप तेरे भाग्य रेखा नहीं है।'” यजमान सुनकर हंस पड़ा | “ऐसा कह। | ५ है 1४,| 1 साले, छिपाता क्‍यों है? भाग्यरेखा कहां होती है?” $ | ॥ है |. इधर, यहा से उस अंगुली तक जाती है। 1८) | “'भाग्य-रेखा नहीं होती है तो धन कहां से मिलेगा? '' ह। ' | | के । | है बन सी |




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