कालिदास और उनकी कविता | Kalidas Aur Unki Kavita

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : कालिदास और उनकी कविता  - Kalidas Aur Unki Kavita
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about कालिदास - Kalidas

Add Infomation AboutKalidas

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
( शपसमस्या को हल करना दो उन्होंने झपने जीवन का प्रधान उददेश समसा । ऐसी स्थिति में फवियों घर राज का चरित कोई क्यो लियना श्लौर देश का इतिहास लिखकर कोई फयी झापना समय खोता ? +यह श्राख्यायिद्धा प्रसिद्ध है कि कालिदास विक्रमा- दिव्य फी सभा फे नव-रक्षों में थे । नो एणिडत उनकी ससा' के रल-रूप थे; उन्हों में कालिदास की भी गिनती थी । गोज् से यह वात भ्रम-मूलक लि हुई दे 1 “घन्वन्तरि- झ्पणुकामरसिंदशडू ”--थादि पद्य में जिन नौ विद्वानों के नाम थ्राये हैं वे कमी समकालीन न थे । चराहमिहिर भी इन्हीं नौ विद्वानों में थे । उन्होंने थपने ग्रन्थ प्चसिद्धान्तिका में लिखा है कि शफ ४२७. झथात्‌ ५०५ इंसवी, में इसे मैंने समाप्त किया । झ्तपव जो लोग ईसा के ५७ वे पूचे उज्जैन के महाराज चिक्रमादित्य की सभा में इन नी घिद्वानों का होना मानते हैं वे भ्रूलते हैं ।कालिदास चिक्रमादित्य के समय में ज़रूर हुए पर ईसा के ५७ वर्ष पहले नहीं । ईसा के चार-पाँच सी बर्ष चाद किसी श्औौर ही विक्रमादित्य के समय में वे हुए । इस राजा की भी राजधानी उज्जैन थी । यद्द नया मत हे । इसके पोषक कई देशी 'और चिदेशी चिद्वान्‌ हैं। इन विद्वान में कई ,.का कधन तो यदद है कि कालिदास किसी राजा या मद्दाराजा के झाधित ही न थे । वे गुन्तचंशी फिली घिक्रमा- दिंत्य फे शासन-फ्राल में थे धवश्प; पर उसका 'ाश्रय उन्हें न था । हाँ, यदद दो सकता दे फि थे उज्जैन में चहुत दिनें तक रहे हो शीर उज्ञपिनी-नरेश से सद्दायता पाई दो ! परन्तु उज्ञुनी के श्रघी्वर के वे झाधघोन न थे । उनका नाटकवे असिदज्ञान-शाकुल्तल उज्जैन में मददाकाल-मद्दादेव के किसा




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now