आधुनिक हिन्दी कविता | Adhunik Hindi Kavita

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सौलाना अल्ताफ़हुसेन हाली इनका जन्म सन्‌ १८४१ में पानीपतमें हुआ और सन्‌ १९१५ में इनकी मृत्यु हुई। इनको वचपनसे ही _ कविता लिखनेका शौक था। इन्होने उर्दू थायरीकों पुराने ढरेसे निकालकर उसका क्षेत्र बढाया और जीवनके साथ उसका सवध वाँघा । इन्होंने देशप्रेम सामाजिक सुधार और प्राकृतिक विषय कविताके विपय वनाये । ये बडे साधु स्वभावके आदमी थे । इनकी मुसदस चुपकी दाद मुनाजाते वेवा और कौमी नफ्में बडी मदह्र रचनायें है। . मुसीबत मुसीवत्तका इक-इकसे.. अहवाल कहना . मुसीवतसे है यह मुसीवत जियादा ॥। कहीं दोस्त. तुमसे न हो जाएँ बदज़न। जताबो न अपनी. सुहव्वत डियादा॥। जो चाहो.. फक़ीरीमें. इज्ज़तसे रहना। स रक्खो. अमीरोसे मिल्लत डियादा॥। फरिक्तेसे बेहतर है. इन्सान बनना। सगर इसमें पड़ती है मेहनत ज़ियादा ॥ हिम्मत न हारो मगर घंठ.. रहनेसे चलना है बेहतर कि है अहले-हिम्मतका अल्लाह यावर | जो ठण्डक्मे चलना न भाया मयस्सर तो पहुँचेंगे हम घूप खा-खाके सर पर ॥ यह तकलीफ ओ राहत है सब इत्तफाकी। चलो उद सी है वक्‍त चलनेका दाकी ॥। 9




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