भागवत संप्रदाय | Bhagavat Sampradaya

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Bhagavat Sampradaya by मुंशी देवीप्रसाद - Munshi Deviprasad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्प विषय-पूची विषय प्छ (४) दरिदासी मत ०६८१ (५) गुजरात में वैष्णव धम नरसी सेहता सीराँ बाई स्वामी नारायण पंथ का उद्य तथा सिद्धांत ६०६-६८६ १२--वैष्णव साधना ११-६६ १ १ वेष्णुब द्शन की पिशिष्रता-- ६११ जीवविषयक साधन विषयक तथा मुक्ति विषयक बेशिष्ख्य ६१२-६१४ २ वेष्णव मतों में साम्य और वेषम्य-- (क) साम्य (ख) बेषम्य ६१४ ३ पद्चचा भक्ति-- (१) शान्तरस (२) प्रीतिरस (३१ प्रेयोरस (४) वात्सल्य रस (४) माघुयरस २३-६३ १ ४ गोपी भाव-- ः गोपियों की भक्ति काम तथा प्रेम में पाथ॑क्य ः ६३२-६४०. ४ रस साघना-- साधना के त्रिबिध माग प्रवतंकठुमाग की विशिष्टता भावदेदद भावरेदद छोर बाह्देह मददाभाव की प्राप्ति के दो मागे॑ ६४१-६४६ ६ लीला प्रसंग-- का वेष्णुव संप्रदायों में लीला के सेद गोपी तथा संजरी भगवान का कैशोर-बय कुल्ललीला तथा निकुज् लीला दू४६-दू५६




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