राजप्रश्नीय सूत्र भाग दूसरा | Shree Raajprashniya Sutram [ Vol - Ii ]

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Shree Raajprashniya Sutram [ Vol - Ii ] by कन्हैयालाल - Kanhaiyalal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शुद्धओवे । 1: चि सास्थी ण्था ख़स्‌ अन्य अज्ज्ञत्यिए निबिणणाणा निविण्णागं चि सारथिसेव मूर्वा हाता है जा मस्तर बाण करेति जढ पय्‌ पहीसी राय खल पुरि अण्ण जवियतत जी चि अन्नजी वितत्वमू पवि चर्य ज्वड : ऊ पवासशि केशा ए्से केसा कुमारसमणे प्रासकेपणीयान्नमात्र बिनः श्रतज्ञान प्रसार के चर्लवाणे धर शुद्धप्रविश्यानि चित्र सारथी ज्ये। खलुं स अन्रैव अज्ञत्थिएं निज्विण्णाणा निव्विण्णाण .._ चित्रसार थिमेव चित्रसारथिमेव हांता है जो मर२त१त5५१1०ण। करोति जड़ वन्य पणएसी राया खलु पुरिस अण्ण जीवियत्त जीवित अन्नजी वित्त परिचय जड़ पहजुवासति केशी ण्से केसी कुमारसमणे प्रासंकेषणीयान्न मात्र जीविनः श्रुतन्नान प्रकार केवलणाणे १५४ १५४ १५४ श्प्ष्‌ ५१५५ २५७ श्थ्ट १५८ ५१५९ श्६२ १६२ १६२ पएर्‌ १६३ १६४ पद २६५ २६६ १६६ १६६ श्‌ ६७ श्‌ ६ | श्६७ श्ध्द श्ध८ १६८ श्ध्८ २७० श्छर्‌ १७० १७४ /१3 (१ श्ट




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