उर्दू की सर्वश्रेष्ठ कविता | Urdu Ki Sarvseth Poetry

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Urdu Ki Sarvseth Poetry  by कन्हैयालाल - Kanhaiyalalकृष्णचंद्र - Krishnachandraराजेंद्र सिंह बेदी - RAJENDRA SINGH BEDI

लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :

कन्हैयालाल - Kanhaiyalal

No Information available about कन्हैयालाल - Kanhaiyalal

Add Infomation AboutKanhaiyalal

कृष्णचंद्र - Krishnachandra

No Information available about कृष्णचंद्र - Krishnachandra

Add Infomation AboutKrishnachandra

राजेंद्र सिंह बेदी - RAJENDRA SINGH BEDI

No Information available about राजेंद्र सिंह बेदी - RAJENDRA SINGH BEDI

Add Infomation AboutRAJENDRA SINGH BEDI

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
वेक्सीनेटर १६ पांव-तले रौद सकते है । तुम हमे नही पहचानते । हा हा हा “ओर मैं पागल हो जाता हूँ, और सोचता हूँ कि जब तक ये चमकते हुए बुर्ग मौजूद है, मेरे मन को शाति नही प्राप्त हो सकती | बहुधा मेरे मन मे विचार उठता है कि एक-दो रुपये कौ वारूद लेकर मँ रात के समय इस पुराने महल के निकट जाऊँ और वारूद लगाकर भक से इन वुर्जों को उडा दूँ, तो ** तो'' 'लेकिन मैने हर बार इस विचार को मन मे ज्ञोर से दवा दिया है। ओर वेक्सीनेटर ने रहस्यमय लहजे में रशीद की ओर श्रुककर कहा-- “लेकिन एक दिन मै इस काम को अ्रवश्य पूरा करके चोदा 1 दा




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now