तर्कसंग्रह | Tarksangrah

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Tarksangrah by श्री कृष्णदास श्रेष्ठिना - Shri Krishnadas Shreshthina

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भाषाटीकासहित । ( १७) सम्बन्धी ) दिव्य ( आकाशसे सम्बन्ध रखनेवाढा ) उदय (उदर्सम्बन्धी) ओर आकरज ( खानि सम्बन्धी ) भेदसे । भोम अग्नि आदिहै। पानीसे प्रकट होनेवाला तेज दिव्य बिजडी आदि है। खाये हुए भोजनको पचाने- वाढा तेज उदय पेटमं रहताहै । खानियोंसे उतन्न होनेवाला तेज आकरज झुवणादि धातु है। 'छुबर्ण तेज नहीं बल्कि पार्थिव इृव्यहै, पीढेरगका ओर भारी होनेसे वह तेजमे नहीं गिना जा सकता, जैसे हछूदी, इस अनु- मानसे सुवर्णको पार्थिव पदार्थ ही मानना चाहिये ऐसी शद्भग नहीं करनी चाहिये,क्योंकि खूब अभ्निके संयोगसे घी इत्यादिम पतलेपनका वाश होजाताहै और पानी रखनेसे नहीं होता, कोई खास विरुद्ध कारणके विना पृथवीके पतलेपनका नाश और अभिका संयोग इनका कार्यकारणभाव निश्चित है, परन्तु सुबर्णम चाहे जितना अभिका संयोग किया जाय पर उसका पतढापन




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