भारत गाथा | Bharat Gatha

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Bharat Gatha by डॉ० रामकृष्ण शर्मा - Dr. Ramakrishn Sharma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भारत गाया करि-करि सुधि जहाँ साँवरे कन्हाई टेर भरि-भरि आावें चित धीर न धरैया हैं बंसीवट तट पट पीत फहरान जामें लट लटकनि लाल नंद के रिझया हैं ॥ गोपिन के संग भरि अंग में अनंग रंग कुजनि में संग-संग रास के ररचया हैं । जाकी माँटी चाटी तीन लोकन के ईस हू नें हम तौरे भंया वाई देस के रे हैवंया हैं ॥ जाके नर नारी वाल बृद्ध कान्ह-कान्ह टेरे फेर-फेर आवें सुधि बाँयुरी वर्जया हैं ॥ गोपिन के प्रान प्यारे ग्वाल रिझवान हारे बंसीवट तट चोरि चीर के चुरेंया हैं ॥। नाग के नया दधि-माखन खर्वया बन गाय. चर्खैया बलदाऊ जू के भेया हैं। याकी छवि हेरिये कु जामें देव-देव आमें हम ती रे भेया वाई देस के रंहैवैया है॥ कक




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