सबरस | Sabaras

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Sabaras by भगवतशरण उपाध्याय - Bhagwatsharan Upadhyay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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49 50 51 सबरस ७ 25 हर मोड पे मिल जाते हो तुम माजरा क्‍या हे ? नई नहीं हे 'फूलों की बेवफाई काँयें का प्यार! चाहा और हो! समझाया और ही किया और ही !




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