भारत की कहानी | Bharat Ki Kahani

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Bharat Ki Kahani by भगवतशरण उपाध्याय - Bhagwatsharan Upadhyay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भारत को कहानी १३ जंगली पेड़ों के फल, जंगली श्रत्न खाता था। बहुत दिनों बाद उसने जंगली आग में जले जो जानवर खाए, तो उसने भूनकर ओर श्रन्त रांधकर खाना शुरू किया। बहुत पीछे उसने नमक का जायका जना । ५ न, ৮778 77 हे ¢ 107 1 5৮ 9३ না) ্‌ ০ (71 हैं, १४५ ४ है न 1 क + ६५५ ^ 4 রা রি পা / १ € क (९४३ ^ ^ है ५ এনা দত 98৮ | । ५ , ५५ ५५ ০ & ४ দিদি) ৮৭৮8৫) ॥ तब वहू भुष्ड से रहता था, गिरोह बांधकर । उससे शिकार करने में आसानो होती थी । मिलकर रहना उसको पहली खोज थी, श्राग दूसरी । धीरे-धीरे वहु पद्यु पालने ओर ढोर रखने लगा । तब वह इधर से उधर ढोर लिए फिरा करता । धीरे ही धीरे उसने खेती शुरू की । तब वह गांव में जमकर रहने लगा। श्रन्न ठोने के लिए उसने बेल- गाड़ी बनाई । उसने जाना कि गोल पहिया ही चपटी




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