पञ्च - पात्र | Panch - Patra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शत ]१३-अज्ञातकहां है नाथ तुम्हारा घाल। खोऊ फिरा सर देख लिया + अब में दोंगया दृताश।॥मुये व्यर्थ श्रम टेस जद प्रति करती है. उपहास । वाया. जिसका पता. नहीं वह रहता. उसके पास वाब्रात काल पथ लाती हैँ उसका... इुछ. साोदेश | मूक प्रटति को ही कह जानीउसका आदिेदा ॥छ्ण भर मे नये जड़ में होजाता चैतवय विकास ) खूक्छो पर विक्रसित पूल्टों का होता हारा किस 1!हँस हंस कर जट की तककरता सानत.. फिटार )मर खर्गों के अहग्य केभर जाता हैं. हसारा लिए मपाहआऋार में सक ऊ मरद हो हा. एाओआ 1कई73




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