ऋषभदेव एक परिशीलन | Rishabhadev Ek Parishilan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
181
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्र ऋषभमंदेव_ एक परिशीलन
1२] उत्तरकुर में मनुष्यथहाँ से धन्ना साथवाह का जीव आयु पूरा कर दान के
स् उतरकृरुसत्र में मनुष्य हुआ।[३] सोघम देवलाकवहाँ से भी साग्रुपूण हान पर धन्ता साथवाह का जीव ९
मे टेव रूप मे उत्पन्न हुआ ।
२४ सो अहाउय पालइत्ता तेण दाणफलण उत्तरकुरुमणुतो
--आवश्यक घूणि
(ज्) तेण दाणफ़लण उत्तरकुराए मणुसो जाओ |
+- आवश्यक ह्यारिभद्रीमावत्ति
(ग) सा ये अहाउय पालित्ता काक्षमास्रे काल किचा तेण
उत्तरकुराए मणूसा जातो +
-+आवश्यक मल वृत्ति
(घ) कालन त्रत्र पूर्णायु कालधममुपागत ।
आस्थितकान्तसुपमेपूत्तेत._ कुरुष्वसौ ॥
सीतदानथ त्तरतदे ज॑म्पूवृक्षानुयुवत ।
उत्पेदे युग्मधमेंण. मुनिदानप्रभावत 1॥॥--त्रिपष्ठि ११1२२६-४२५ (क) ततो आउक्शएण उच्दट्टिऊणं सोहम्मेकप्पे तिपलिओ
देवो चाबी ।-+आवश्यक घूथि(थ) ततों आउवलए सोहम्मे कप्पे देवों उववश्नों ।
“आवश्यक हारिभद्रीयावृत्ति प
(य) जावइ्यक भूल छू प (शछा३
(पे) मिधुनायु' पालयित्वा धनजीवर्ततश्च स |
प्राग्य मदानफ़लत सौधरमें तिदशोमवत् 1
+-त्रिपष्छि
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