संस्कृत नाटको का जीव जगत | Sanskrit Natako Ka Jeev Jagat

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutK. K. KRISHNA KUMAR
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
27 MB
कुल पष्ठ :
229
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about के० के० कृष्ण कुमार - K. K. KRISHNA KUMAR
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१४ |] संस्कृत नाटकों का जीव-जगत
७. विष्किर--पैरों से कुरेद कर भोजन की खोज करने वाले जस्तु ।
८. प्रतुद--चोंच से कुरेद कर भोजन की खोज करने वाले जन्तु ।
सुश्रुत ने जन्तुओं का विभाजन दो मुख्य वर्गों में किया है--अनूप और
जाड्भल । इनमें अनुपष ५ और जाल आठ प्रकार के होते हैं। इस प्रकार कुल १३
भेद हैं, जो निम्न हैं-- ह
(क) अनूप जन्तु--
१. कुलेचर--नदियों और जलाशयों के तटों पर विचरण करने वाले चोपाये।
जैसे--हाथी, गैंडा, गवय, मृग आदि ।
२. प्लव--उभयचर जन्तु । जैसे--हंस, बगुला आदि ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...