देशकर्मपद्धति | Deshkarm Paddhti

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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स्रीगर्णशाय नमः । दशकमंपद्धतिः। भाषाटीकासहिता। अनम््पज्व्य्त दमा फसल अथ गर्भाधानस्‌ । तत्र ऋतुन्लाता चतुथंदिने वधूः भातस्तृष्णीमादित्यम॒पति्ठेत्‌ त्ततस्तदिने माठ्यूजाभ्युद्यिक कृत्वा पोडशरामादवाक शुभराजों मह्ूलाचरण । अजण्डमैश्वययुतं परेश विधाटवीध्यंसनमेकममिस्‌ । गजानन॑ तं मनसा प्रणम्य करोमि भाषां दशकर्मपद्धतेः ॥ १॥ यतो5भूजन्मादिः सततमपरोक्षस्य जगतः परोक्षत्व॑ तस्मिद्‌ मतवति च कस्तत्र विलयः ॥ क्ृतातः सा भूम्रो बुधनवविकाशाय विदुपा । कन्हेयालालेन आ दिशतु धः ॥ २॥ ह्ा। विश्न विनाशन गबवदन, नाहानहार र केश | कृपा कीनिये दाप्त पहँ, दाता सिद्धि गणेश ॥ १ ॥ कमेदेव पद वन्दि पुनि, गुरुकों शोश नवाय । इलिखत पद्धती कमेंकी, कीजिय आय सहाय ॥ २ ॥ अब गर्भावातसंस्कार लिखा जाता है । तहां चोथे दिन कतुस्तान करके ञ्री भातःकाल मीनबतघारणपूर्वक सूर्यके सन्‍्मुख हाथ जोडकर खडी हो जाय । फिर उसी दिन पोच्श मातकाओंकी प्रजा और नान्दीसुखस आद करके




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