अनासक्ति योग | Anasakti Yog

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Anasakti Yog  by मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अनासक्षियोग 5 ४ र्जुनविषादयोग जिज्ञासा बिना ज्ञान नहीं होता । दुःख बिना सुख नहीं होता । धर्मसंकट--हृदयमथन सब जिज्ञासुओंको एक बार होता ही है । छूतराष्ट्र उदाच धर्मक्षेत्रे कुरक्षेत्रे समवेता. यूयुत्सव । मामका पाण्डवाइचेव किमकुर्वत संजय ॥ १ ॥ श्रतराष्ट्र बोढे-- हें संजय मुक्त बतलाओ कि धर्मक्षेत्ररूपी कुरु- क्षेत्रमें युद्ध करनेकी इच्छासे इकट्ठे हुए मेरे और पांडुके पुत्रोंने क्या किया ? १ टिप्पणी--यह शरी ररूपी क्षेत्र धर्मंक्षेत्र है क्योंकि यह मोक्षका द्वार हो सकता है । पापसे -इसकी उत्पन्ति है और पापक़ा यह भाजन बना रहता हे इसलिए यह कुरुक्षेत्र है ।




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