रतिनाथ की चाची | Rati Nath Ki Chachi

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Rati Nath Ki Chachi by नागार्जुन - Nagaarjun

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गौरी को झपकी आ गई थी। आहट पाते ही उसने आँखें खोल दी । घमाइन ने करीब जाकर देखा । बोली--आठवाँ सहीना है। बद्चुई, नाहक तुमने बप्तत बर्बाद किया। पेद् तीन-चार महीने तक काबू मे रहता है। अब देखना, तम्दुपस्ती पर कितना युरा असर पडता है। माँ को अंदेसा हुआ। उसने आँखें फाडकर पृछा--ययों री, गौरी की देह की , फिर तैयार होने में बहुत दिन लग जाएँगे ? हां मलिकाइन --वमाइम घर से बाहर निकलती हुई बोली--दुर्मंभी भालिय करवाती रहें तो पघीस दिन लगेंगे। हु, आड और बल बदुई पी यु खाने नही देना । आज अभी तो सा चुकी-- माँ ने कहा-- हाँ, रात और बल नही खाने दूंगी। तो तू कल रात आएगी न ? जरूर माईजी, आती तो में आज शाम को भी, मंगर डीहटोल में सरहेस' महाराज वी पूजा है। भाव-भयत होगी । हमारे यहाँ दे सभी जाएँगे देखने । बुधन चमार की औरत चली गई । गौरी की मा ने उंगली पर गिनकर हिमाव लगामा। बड़ी छुट्टियों मे, सामशर गरध्ियों में जयडिशोर बाँव अवश्य आया डरते । इस थार भी आएंगे। मा ने सोचकर देसा, आधा चँत बीत चुका है। अभी ममूया वैयास पडा ही है | जेठ के दशहरा से पहले शायद ही कभी जयक्रिशोर जा स्कूल बन्द हुआ ही । और, तव तक गौरी विल्कुल तत्दुस्स्त हो जाएगी | इस गणित से यम बुद्धा को कुष्ठ आश्वासन मिला ! जयरिशोर बाबू बहुत ही अच्छी प्रदृति के आदमो हैं, फिर भी माँ वो खटवा था कि अपती बहन के सम्बन्ध में यह मुराद जब शिमी तरह उन्हें मालूम होगा दो कुछ कहेंगे अवश्य 1 इगके अति- रिलत, उमानाय भी शिसी-किसी साल आम खाने आता है । अपनी माँ के बारे में जद वह सुतेगा तो आश्वय मही कि शुएं में कूद र जान दे दे या माँ को ही मार डाले | लड़वी गो छः माम-आठ मास अपने पास रखना माँ को कौर भी सारी लग रहा था। इन दातों को मोचते-सोचते वृद्धा वा दिमाय उद पदण गया तो एक बार फिर बाप पुरददाले घर में घुसी और गुस्से में धार यौटी की ठोडी में एक दुलगा लगा दिया। गौरी हाउ-हांउ बरके रो पदी। हयों से बॉसू की घार जो बहने लगी तो उसने बन्द होने का नाम ही नहीं लिया था। माँ जी कदाकर २ देर बदार्‌ खड़ी रही, फिर धम्म से दही बैठ गई और सदर को बरती /.




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