सतरंगे पंखोंवाली | Satrange Pankhonwali

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Satrange Pankhonwali by नागार्जुन - Nagaarjun

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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यह तुम थीं १८ कर्‌ गई चाक तिमिर का सीना जात की फक यह्‌ तुम्‌ थी सिकुड गई ग्ग्-ग्गण झलस गया अग-श्रग वनाकर ভুত জী गया पतझार उलग भ्रसगुन-मा खेडा रहा कचनार अचानक उमगी डानो की सपिमं छरहरी रहनी पोर-पोर में गसे थे टूसे यह तुम थी झका रहा डाले फैलाकर कगार पर खड़ा कोढी गूलर ऊपर उठ आई भादों की तुलझग्रा जूडा गया बौन की छाल का स्था-रथा यह तुम थी !




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