सतरंगे पंखोंवाली | Satrange Pankhonwali

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : सतरंगे पंखोंवाली  - Satrange Pankhonwali
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about नागार्जुन - Nagaarjun

Add Infomation AboutNagaarjun

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
यह तुम थीं१८कर्‌ गई चाक तिमिर का सीना जात की फक यह्‌ तुम्‌ थीसिकुड गई ग्ग्-ग्गणझलस गया अग-श्रगवनाकर ভুত জী गया पतझार उलग भ्रसगुन-मा खेडा रहा कचनार अचानक उमगी डानो की सपिमं छरहरी रहनीपोर-पोर में गसे थे टूसेयह तुम थीझका रहा डाले फैलाकरकगार पर खड़ा कोढी गूलरऊपर उठ आई भादों की तुलझग्राजूडा गया बौन की छाल का स्था-रथा यह तुम थी !




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now