वे दोनों और वह | Ve Dono Aur Wah

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Ve Dono Aur Wah by विमल मित्र - Vimal Mitra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हम सोग भी बेसवर थे । डायरी ने लिसने के कारण तारीरा नदी बता सतठा, पर याद है, धादी बी रात बदामतत्ले के करीब समी लोग भोज में धामित होने के लिए दौडे थे। धनी घर में धादीनौघत, वाजा, बेड पार्टी, शटनाई सर्भ एकसाथ बज रहे थे । सढक फूलों की माला से सजाई गर्ई थी । से मोटरगाडियां सदी थी । हम वृष लड़के बराती थे। बदामततते में असलीवुर र्यादा दूर नहीं । हम लोग बस में शोर मचाते, सुशी से उछलने हुए पहुंचे थे। अटल दा भी गाड़ी मे बर बनकर, फूलमाला पहने, सेहरा बाधे, सजे-पत्रे बैठे ये | साप ही आशु बाबू, पुरोहित और गई अन्य सम्जन भी थे। पर मुर्के ऐसा लगा, जैसे अटल दा योडे पवराए हरण्‌ हैं। आशु बाबू बोले---अटल नाराज़ हो रहा था । मह रहा था इतना दिसावा करने वी वया छसूरत थी ! अटस दा अपनी थादी के पटले दिन तक अपनी धादी के बारे में मु नहीं जानते थे । यह रांची गए हुए थे। राची से उन्होंने हमें एफ घिंटुदी भी लिखी थो। चिटूटी में उन्टोने लिया था--अपनी जाति मो ऊपर उठाना पड़ेगा, अपनी कमजोरियों पर कायू पाना द्वोगा। हमारी रोड़ ठेढ़ी हो गई है, इसे सीधी करना होगा । देश के नवयुयक यदि संनेध्ट न हो तो हम बिलकुल पीछे रह जाएगे। दूसरे देश इतनी तरवती फर रहे हैं । तुम भी आदमी वनों । वचन ओर फर्म में एक रहो। भरा शुम सोर्यो से ट्रर रहकर मैंने अनुभव विया कि यहा के लोग वितने परिक्रमी हैं, वितनी एगता है इनमे 1 हममे इसी चीज़ की कमी है। मैं सौटफर आऊगा तो नये सिरे मे पतव को व्यवस्पित करूंगा। हमें नये ढग से सोचना पड़ेगा, यदि प्राप्त शिक्षा यो हम सारथव ने बर राह तो जीवन ब्यर्य है। और भी बहुत-मी बातें अटल दा मैं सियी थीं । मैने पूछा घा--बल तो तुम्हारी धादी है, अटन दा ? +पादी ? अटल दा मानों चोंक उठे । फिर अनमतलेन्स होरर मकान के धन्दर चले गए । उसके बाद मकान के अन्‌इर बया हुआ, पह, मुझे मालूम नहीं । हम सोग तो सिर्झ धादी वाते दिल सज-पजदुर




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