ब्रजभाषा : रीति - शास्त्र ग्रंथ - कोश | Braj Bhasha-riti Shastra Granth Kosh

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Braj Bhasha-riti Shastra Granth Kosh by जवाहरलाल चतुर्वेदी - Jawaharlal Chaturvedi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भ् ब्रजभाषा रीति-शास्त्र ग्रंथ अनुप-रसाल रच ०--खतरगच्छी जन उदयचंद रच० सं०--१७२८ वि०। तीन स्तवकों में--नायिका-भेद नायक-भेद और अलंकारों का वर्णन । अनूप-श्इंगार रच०--अभयराम सनादूय रच ० सं०--१७५४ वि ० जैसे संवतु सतरह चोपना-प्रथ-जतम जग-जाँनि। रसों के साथ नायिका-भेद वर्णन । ब् अमर-प्रकाश रच ०--खुमान कवि रच० सं०--१८३६ वि० । असर-संजरी रच०--जयदेव कवि रच० सं०--अज्ञात । स्त्रियों (नायिकाओं ) के जाति-भेद तथा नवरस वर्णत। प्रा० स्था०--त्रिग्दी वंशीधर भट्ट गोकुल। अमरेश-विलाश रच०--नीछकंठ मूना०--जटाशंकर त्रिपाठी रच० सं०-- १६९८ वि०। संस्कृत--अमरु-शतक का अनुवाद । अर्जुन-विलादष रच ०--फतुहावासी मदनगोपाल शुक्ल रच ० सं०--१८७६ विश अलस-मेदिनी रच०--नंदराम कवि रच० सं०--१७२६ या ५७ वि०। नायिका- भेद तथा रसों का वर्णन । प्रा० स्था०--अनूप संस्कृत पुस्तकालय बीकानेर कोट | असक-विनोद रच ०--बाँदा-निवासी स्कंदगिरि रच० सं०--१९१६ वि० | अष्टकाल रच०--मंजरीदास रच० सं०--अज्ञात । प्रा० स्था०--पं० दोपचंद नोनेरा भरतपुर । संभवत रचयिता--गुन मंजरीदास जो रूप सनातन गोस्वामी कृत--अष्टकाल के टीकाकार हैं । अष्टयाम रच०--प्रसिद्ध कवि देव रच० सं०--१७४६ वि० । नायिका-नायक के अष्टयाम अर्थात्‌ दिन-रात्रि की चौंसठ घड़ियों के विविध बिलासों का १- मि० बं० वि०--र पू० ८द६६। २. इसका नाम-- अमृत-संजरो भी मिलता है । खोज रिपोर्ट ना० प्र० सभा काझो स०--१९१२ ई० पू० ११२। दे. सि० बं० चि०--- पू० बश्६। ४. सि० बें० बि०---३ प्‌० १०८७१ यह प्रंब बलरामपुर के लोथो प्रेस--जगबहादुरी यंत्रालय में सं०-- १९१८ वि० में छत चुका है। मदन गुपाल जो का-- नखसिख प्रंथ भी सुनने में आता है। ५. खोज रिपोर्ट राजस्थान र प० १५२३ ं- मि० बँ० वि०--३ पू० ११४६३




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