भ्रमर गीत | Bhramar Geet

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Bhramar Geet  by जवाहरलाल चतुर्वेदी - Jawaharlal Chaturvedi

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about जवाहरलाल चतुर्वेदी - Jawaharlal Chaturvedi

Add Infomation AboutJawaharlal Chaturvedi

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
पष्ठ सर वा सपय कमफ्थस हू + १५८ 51550 ` १६ विविधस्य सर वस्ये० १८९ द दुदर्थ ता म्फाटिव तुममीपुर० दने सने विर दवि्पौ हयमूनं पुर्ण दुष्य भर्व पुनमजिर हष অন মুল ইহা দূহলিত देहेन्द्ियप्राणमर्नणिया भोर प्रथिवी चोद्य হুঙবাংদি श्रात्रीरुदव० द्वापर द्वापरे विष्णु ० दिया ज्ञान तु० रीत वैय ‡त० देपप्रतिपस भावार ध धस्या गे। कुलरन्थ[० ब्याने बलास्‌ परमेहुस७ नं ते कमफसबी आना न खत गोॉपिकानेदमी ० ने सक्षुपा शहतें० ते एसमेस्य ने महेद्रपिए्ण ३० সাধে নিয়ত १३१ সস +. २१५ ২ १७६ ८ ३०७ ^“ ११९ पृषु मय ন সান पिता तक्र दद मे रोययति मा योगोऽ २९६ वु मननितशन्य० {५६ न चे बरणीपूर्व ० २८१ म सोऽनि प्रययी शेरे २१५ महि कथ्िक्षणमपि० १५६ नाचरे वेदो ` १६५४ निव्यहुगात्ति' मिः ० ' १५। नियत कुर कन्व ` २५१ নিখিল নিশাত १५८ निर्य লিগে ৮৭8৫5 ध पंसल উনইলি अतिनिवह्तर ३१४ परीष्य लोकाम्सर्म चिता २१३ परोषयाराय पृष्याय० १५४ दधे चद्रमुष्ठी चद्वमट० १९७ पप्रकषों गोभुमियेंद० * १८४ परिनष्ठीव तश्गारी: ० १९६ पुनस्ता पवर विजिधो# १६६ प्रकाश च प्रड्माने च० २९१५ परक्नैरुणन्मृदार ` ९८ प्रभमति पडफति० क प्रसमुरूप, एर[गरूण< १४५ प्रर३समितेश्नर्द ० ष प्रयपये(गञर० १२५




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now