अच्युत | Achyut

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : अच्युत  - Achyut
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about चण्डीप्रसाद शुक्ल - Chandiprasad Shukla

Add Infomation AboutChandiprasad Shukla

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
[ १ | विषय प्र... पंक्ति परमाणुजगद़कारणल्लाधिकरण [8 १७०-१२०८]तृतीय अधिकरणका सार ,,, रे हर ११७० - ६ ११वां सूत्--उभयथापि न कर्मातस्तदभावः बजे ११७० - १२ परमाणुकारणवादका उत्थापन सन ०. ११७६१ - २परमाणुओंके, आधकर्मके निमित्तकों न माननेपर कर्म नहीं होगा, औरमाननेपर भी उस समयमे दृष्ट प्रयत्ष आदिके अमभावसे कर्मनहीं होगा इस प्रकार परमाणुकारणवादका मनिरसन ११७४ - ७ आत्मा समवायसम्बन्धसे रहने अथवा अणुओंमें समयवायसंवन्धसेरहनेसे अहृष्ट आद्य कमका निमित्त नहीं है... ११७५ - ८संयोगके स्वरूपका खण्डन बढ; ०. ११७७० ५महाप्रतवमें भी विभागकी उत्पत्तिके छिए. परमाणुओंके कर्मका असम्भवनग्रदर्शन रन ०. ११७८ - ७१३वो सूत्र--समवायास्युपगमाश्च साम्यादनवास्थितेः ह.. - िंद्क «६भिन्न समवायको माननेपर उसके अन्य समवायकी कल्पना करनेगे अनवत्यादिखछाकर समवाय निराकणपूर्वक परमाणुकारणवादकानिराकरण ,,, बंध गे ११८० - १५“यहॉपर' इस ग्तीतिसे ग्राह् समवाय समवायीसे निद्यसम्बद्ध ही ऐ अतः अनवस्था नही है इस संभावनाका निराकरण१४वों यूत्र--बनिद्यमेष च भावात्‌ बह व , होपरमाणुओोके प्रदत्तिसभावत्व आदिसे चार प्रकारते विकृत्प करके अन्य दोपका प्रदर्शन कक१५वों चूत्--रूपादिमस्‍्वान्न विपर्वयों दर्शनात्‌परमाणुओके रुप्रादियुक्त होनेसे उन थूंठता और आनित्यताकी घर प्रास्ति होगी ,,, ख११८१-६८३ --११८३ - १० ११८४ - १२शनि बज ही ११८५ - ४गोद के करनेके लिए केगादसूचित प्रथम हेतुका खण्डन ११८६ - ७जो शेकम ला हे «३५ *०» ११८६ - ६१६वों सूत्र--उभयथा चे दोपात्‌ हि पापरमाणु अधिक गुणवाले और न्यूनगुणवाले भा जाते हैं अथवा नहीं शक व प्रकार विकृत्पकर अन्य दोषका प्रदर्शन हेश्ध्वों पज़रे--अपरिमहाब्रात्यन्तमनोक्षा की११२ ११९३ - ३५




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now