आवश्यक सूत्रम् | Aavashyaksutram

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Aavashyaksutram by कन्हैयालाल जी महाराज - Kanhaiyalal Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१ ६रीयापुदी सअद्धयना पंडित रत्न क्षार्टथ ६९८ भछाराग्यने। न्भक्तिआय श्री श0०[धुर ता, १६-१२-१६-५५ पृष्थ्यपाह शानप्रवर- पंडितरत् पृष्वय श्री धासीवाक्षण४ भड(२७८ जाध्यिनिपरे।नी सेवाभा जाप सी सुण सभाधीमभां छेशि। सूत्र अध्शनर्तु धाम खुधर थे रहें छे ते ब्यणी जलंत शान, हे नस्भापना प्रशशीत थयेक्षां उेटकषं४ शने। कया सुबर ने सरक्ष सिद्धांवना न्‍्यायने उुष्टि अश्वी हीडा पडितरतीाने सुजिय थछ पे ऐेपी छे, सूक प्रधशनतु धाम लश्ति पृ थाय मे भावि मात्मामाने सात्म5ध्याणु शशवार्भा साधनभूत थाय शेर शक्ष्यथना, क्षी, पाइितस्त्न जाणग्रह्ष्थारी पू श्री काएंन्धथ८ भरछाश०/नी जाश।वुसार शान्तिभुनिना पायव ६न स्पी४1२शे।, 5, ११-५-५९ नीरभणास णन्‍छाविर्षात पृव््य, भद्ाराप्य श्री शा्तयंद००. भद्धारा्ण्ना, संप्रद्ययना सात्मा्थी, डियापान, पडितर्त्न, झनिश्री समरथमश०७ भद्ाशं्ने। जशिप्राय, जीयनथी जावेक्ष ता, १९-२-प६न। पत्रथी 5प॒नित, पृष्य जायाय घरीक्षालए्ट भद्ारा्ट्न। खूसतपई ह. बूनेनु क्षणाणु सुंदर खने सरण साषानां थाव छे, ते साडित्य, पडित भुनिश्री समश्थभश०० भछ२०, सभय शछे भणवाने आरणु सांप ब्येष्ठ शझया नथी छता पटक्षा साहित्य प्लेथ छे, ते णहु ०४ साहइ जने भनन साथे क्षणायेव्ष छे ते क्षणाणु शासर जाणने मपतुश्प क्षाणे छे जा साहित्य हरे४ अदा स्थवाने बांयवा येज्य छे खाभां प्थानडबासी समाण्टनी श्रद्धू, प्रद्षणा। जने इरसणानी हृढ्ता शाख्रावु॥ण छे. सथाय श्री जपूर्व परिश्रम क्षण समार/ ठप२ भद्धान 8थथ्चा२ 3रे छे. की, डीशनक्षात्ष भृथ्वीरा० भा >२ णीयन,




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