भारत रत्न विजेता | Bharat Ratn Vijeta

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
125
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)25वे गौरव के पात्र पे । मगर उपके अन्दर अहकार वी भावना
नही धी। वे सरल स्वभाव के बोर मृदुभापी थे। उनयी बात का
प्रभाव सुनने वाले पर अवश्य पडता । ये सरलता के साथ अपनी
बात समसा देते पे। पह सरलता ही उनना विशेष गुण थी । यही
कारण था कि उससे वोई भो नाराज नहीं रहता था। वे सबने
प्यारे थे और सभी यो उन पर गय॑ था।
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