अकेली आवाज | Akeli Awaz

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बंटू घ्तिर झुकाये चुप बैठा रहा । वार्ड श्रीमती अपर्णा सेन ने हंसकर कहा--“कोई वात नहीं । कछेक्टर साहब ने मुझें सव बता दिया है 1”यह सुनकर बंदू ने भरी नज़रो से वार्डन की ओर देखा 1 उसने पूछा-- “क्या बता दिया है ?”“यही कि तुम बहुत अच्छे लडके हो ।”---अपर्णा सेन ने कहा ।बंटू की बादत पडी हुई थी । उसने जीम दिखाई ओर कहा--“हां, बहुत अच्छा लडका हूं।”प्रिसिपल देखकर सन्‍न रह गए। उनके विद्यालय में शिप्टाचार के कड़े नियम हैं । कोई लड़का इस तरह अभद्र व्यवहार नहीं कर सकता । लेकिन वह पहला दिन था । वे चुप रहे । उन्होंने अपर्णा सेन को हुक्म दिया कि वे बंदू को ले जाएं और सव समझा दें 4अपर्णा बंटू को लेकर अपने कमरे में गईं | बंटू ने देखा, उनका कमरा भी व्यवस्थित और साफ-सुयरां था । सारी चीज़ें करोने के साथ लगी हुई थी । उन्होंने वंटू को बैठने के लिए एक कुर्सी दी । उसके लिए मिठाई लेने वे अन्दर चली गईं। बंदू चारों ओर देखने लगा । फिर उसने मिठाई छाती हुई वार्डन को देखा | वोला--“मैं मिठाई नही खाता ।”“तुम्हारे पिता मे फहा था कि तुम्हे मीठी चीजे पसन्द हैं । हमें अपना ही समझो । इसे खा छो ।/--वार्डन ने उसे समझाते हुए कहा ।“अपना कैसे समझ छू ।” एकाएक बंटू ने कह दिया--/मैंने नोता मिस को भी अपना नहीं समझा 1”“कौन नीता मिस ?”-.-वार्डन ने पूछा ।“मेरी टीचर, और कौन ।” खडे शब्दों में बंद ने जवाव दिया ।बार्डत ने चाहा कि वे और भी प्रश्न बंदू से करें। पूछे कि नीता मिप्त ने तुम्हें यही सिखाया है। परन्तु वह पहला दिन था, वे चुप रही । बहुत कहने पर भौ बंटू ने मिठाई नही खाई। वह बोझा--“हम खाएगे तो अपने पैसों से खरीदकर खाएंगे।” *वार्डन ने इसका बुरा नहीं माता। वह मुस्कराती रहीं। बंदू की ये हरकतें देखकर उन्होंने उसे कोई घास नियम भी नहीं चताएं। कहा-- घीरे- घीरे तुम सारे नियम स्वयं समझ छोगे |”




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