श्रीमद्भगवत महापुराण | Shrimadbhagvat - Mahapuran (vol - Ii)

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Shrimadbhagvat - Mahapuran (vol - Ii) by श्री महर्षि वेदव्यास - shree Maharshi Vedvyas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(४)सध्याव विषय पृष्ठ-संख्या३७-केशौ और व्योमाछुरका उद्धार तथा नारदजीकेद्वारा मगवानकी स्तुति “** ३५४ ३८-अक्रूरजीकी जजयात्रा ** ३५९ ३९-श्रीकृष्ण-बकरामका सधुरागमन'** * ३६५४०-अक्रूरजीके द्वारा भगवान्‌ श्रीकृष्णकी स्तुति **' रे७रे ४१-श्रीकृष्णका मथुराजीमें प्रवेश **' **' ३७८ ४२-कुव्जापर कृपा; धनुप्रमद्भ और कंसकी घवराहट ३८४ ४३-कुबल्यापीड़का उद्धार और अखाड़ेमें प्रवेश * ३८९ ४-चायूर। सुशिकि आदि पहलवानोंका तथा कंसकाउद्धार * ३९४ ४५-श्रीकृष्ण-बलरामका यशेोपवीत और गुरुकुछप्रवेश ** ४०० ४६-उद्धवजीकी अजयान्रा *** ४०६ ४७-उद्धव तथा गोपियोंकी बातचीत और भ्रमरगीत ४१३ ४८-मभगवानका कुब्जा और अक्रूरजीके घर जाना'** ४२६ ४९-अक़्रजीका हस्तिनापुर जाना * ४३१द्शम स्कन्ध ( उत्तराघ )५०-जरासन्धसे युद्ध और द्वारकापुरीका निर्माण *** ४३९ ५१-काल्यवनका भस्म होना? मुचुकुन्दकी कथा * * ४४६ ५२-द्वारकागमन श्रीब्रकरामजीका विवाह तथाश्रीक्षण्णके पास रुक्मिणीजीका सन्देशा लेकर ब्राह्ममका आना शक १ ४५५० ५ ३-रुविमणी-हरण हर ** ४६० ५४-शिशुपालके साथी राजाओंकी ओर रुक्मीकी > दर तथा श्रीकृष्ण-रक्मिणी-विवाह * ४६७ ५५-प्रथुग्नका जन्म और शम्बरासुरका वध. 17 ४७४ ५६-स्थमन्तकर्मणिकी कथा, जाम्बबती और संत्यमामाके साथ श्रीकृष्णका विवाह * * ४७९ ५७-स्यमन्तक-हरण) शतघन्वाका उद्धार और अक्रूरजीकी फिरसे द्वारका बुढाना * ४८४ ५८-भगवान्‌ श्रीक्षष्णके अन्यान्य विवाहोंकी कथा' ४९० ५९-भौमाधुरका उद्धार और सोलह हजार एक सौ राजकन्याओंके साथ भगवानका विवाह * ४९७ &०-शरीक्षप्ण-रक्मिणी-संवाद._*** * ५०४ ६१-भगवानकी संततिका वर्गन तथा अनिरुद्धके / विवाहमें रुक्मीका मारा जाना ** * ५१४ ६२-ऊपा-अनिरद्ध-मिलन गगर ** ५१८ ६३-भगवान्‌ श्रीकृष्णके साथ बाणासुरका युद्ध '** ५२३ ६४-वग राजाकी कथा कदर ** ७३० ६५-श्रीवलरामजीका ज्जगमन * ५३५ ६६-पोण्डूक और काशिराजका उद्धार * ७३९ ६७-इ्विविदका उद्धार *** 0५४४रे- ८१-सुदामाजीको ऐश्वयंकी प्राप्ति **'अध्याय विपय - पृष्ठ-संस्या ६८-कोरबोपर बलरामजीका कोप और साम्बका विवाह छकेके ०क ५्र्ट६९-देवर्पि नारदजीका मगवानकी गहचर्या देखना **' ५५४ ७०-भगवान्‌ भ्रीकृष्णकी नित्यचर्या और उनके पास जरासन्धके केदी राजाओंके दूतका आना *** ५६० ७१-श्रीकृष्ण भगवानका इन्द्रपथ पधारना * ५६७ ७२-पाण्डवोंके राजवूय यशका आयोजन और जरासन्धका उद्धार * «० ** 0७४ ७३-जरासन्वके जेलसे छूटे हुए राजाओंकी विदाई ओऔर भगवानका इन्द्रमथथ छौट आना * ५८०७४-भगवानक्ी अग्रपूजा और शिशपालका उद्धार' ** ५८४ ७५-राजपूय यशकी पूर्ति और दुर्योधनका अपमान' '' ५९१ ७६-शाल्वके साथ यादवोंका थुद्ध *** ५९६ ७७-चआास्व-उद्धार कप * ५९९ ७८-दन्तवकत्र और विदूरथका उद्धार तथा तीर्य-यात्रामें बलरामजीके हाथसे सूतजीका वध **' ६०४ ७९-बल्वलका उद्धार और बलरामजीकी तीर्थयात्रा' * ६०८ ८०-श्रीकृष्णके द्वारा सुदामाजीका खागत * ६१२ * ६१८ ८२-भगवान्‌ श्रीकृष्णयलरामसे गोप-गोपियोंकी भेंट ६२३ ८३-भगवानकी पटरानियोंके साथ द्रौपदीकी बातचीत ६३० ८४-वसुदेवजीका यशोत्तव *** ६३७ ८५-श्रीमगवानके द्वारा वसुदेवजीको ब्रह्मशानकाउपदेश तथा देवकीजीके छः पुत्नोंकी लौड छाना ६४५६ ८६-सुमद्राहरण और भगवानका मिथिलापुरीमें राजाजनक और श्रुतदेव ब्राह्मणके घर एक हीज७्कसाथ जाना थी र *** ६५४ ८७-चेदस्तुति हंश् *** ६६२ ८८-शिवजीका सट्ढूव्मीचन ** ६८१ ८९-भयुजीके द्वारा चिदेवोंकी परीक्षा तथा भगवान्‌:का मरे हुए ब्राह्मण-बालकोंकी वापस छाना * ' ६८६ ९०-भगवान्‌ ऋृष्णके छीछा-विहारका वर्णन ** ६९३एकादश स्कन्ध१-यदुवंशको ऋषियोंका शाप * ' ***, ७०५ - २-वसुदेवजीके पास भीनारदजीका आना औरउन्हें राजा जनक तथा नो योगीश्वरोंक संवादसुनाना *** ७०८३-माया) मायासे पार होनेके उपाय तथा बह्मऔर कर्मगोगका निरूपण *** ७१७ . ४-मगवानके अवतारोंका वर्णन ** ७२६-भक्तिहीन पुरुषोंकी गति और भगवानकी पूजाविधिका वर्णन छहे१|




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