धर्मभ्युदय महाकाव्य | 1903 Dharmabhuday Mahakavya (1941)

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1903 Dharmabhuday Mahakavya (1941) by जिन विजय मुनि - Jin Vijay Muni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कंलकत्तानिवासी | ह साधुचरित-मेहिवय श्रीमद्‌ डालचन्दजी सिंधी उष्यस्‍्ततिनिभि्त प्रतिष्ठापित एवं प्रकाशित 2७ 8 जे सिंघी जन ग्रन्थ माला [ जैन भागम्रिक, दाशनिक, साहिलिक, ऐतिदासिक, वैज्ञानिक, कथाव्मक -इलादि विविधविषयगुरिफित;प्राकृप, संस्कृत, अपअंश, आरचीनगूजेर - राजस्थानी आदि नानाभाषानिवद्ध; सावेजनीन 'घुरातन चाद्यय तथा नूतन संशोधनाव्मक साहित्य प्रकाशिनी सर्वेश्रेष जैन अन्थावलि- ]प्रतिष्ठाता श्रीमद्‌-डालचन्दजी - सिंधीसत्पुत्र ख० दानशील - साहिद्रसिक -संस्क्ृतिप्रियश्रीमद्‌ बहाढुर सिंहजी सिंधी 30-59 0 हटप्रधान सस्पादक तथा संचारूकआचाये जिनविजय मुनि(सस्मान्य नियामक-भारतीय विद्या भवत्न-वं व हे )सर्वेप्रकार संरक्षकश्री राजेन्द्र सिंहजी सिंधी वा श्री नरेन्द्र सिंहजी सिंघीप्रकाशनकर्ता सिंघी जेनशा ख शिक्षापी 5भारतीय विद्या भवन, मुंबईक्क्रन्‍ीीी जा //55::::3::::5::..--_-+++७«२२२२२२२२२२२०२००७-००२०३०७ न के, प्रकाशक - जयन्तक्ृष्ण, ह. दवे, ऑनररी रजिट्टार, भारतीय विदा मवन, चौपाटी रोड, बंबई. ने, ७ सुदक-अरंभके १-८ फ़ामे, रामचंदर येपू शेडगे, निगेयसागर ओस, २६-२८ कोलमाट स्ट्रीट, बंबई शेष संपूर्णप्रन्थ मुहक -- शा. शुलाबचंद देवचेद, महोदय प्रिंटिंग प्रेस, भावनगर (सौराष्ट् )




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