ऐलेन्स कीनोटस | Elensh Kinotus

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Elensh Kinotus by महेशचन्द्र भट्टाचार्य - Maheshachandra Bhattacharya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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; शेगारिकस मल्‍्के रियस रदसमूची देह नाचने लगती है , समूची देहका काँपना ( चेहरे- को पेशियोंकी ऐ ठन--माइरोल ) ।ऐसा अनुभव होता है, मानो वरफ छुगया है या वरफकी तरह टण्डी सुद्याँ चर्मम चुभोयो जा रही है, मानो गरस सुद्र्यां गडायी जा रहो है।शरीरके बहुत-से अशोंम , कान, नाक, सुखमरठल, हाथ और पैरोमें जलन और खाज , वे अश लाह, फुले और गरम रहते हैं। खडे रहनेपर ।चाल अनिशित , रातमें पडनेवाले प्रत्येक पदार्थये ठोकर खाता है , उसे ऐसा दर्द अनुभव होता है, मानो किसेनेमारा है। पोठकी रोठमें स्पर्श सहन नहीं होता ( थेरिडियन ) ,सबवगेके वक्ष बदतर हो जाता है।दर्द, कटि और त्विक-प्रदेशमें यत्रणा, धीमा घोमा दर्द, यह दिनमें परिश्रम करते समय और बैठे रहनेपर होता है ( जिड्म ) बहुत व्यादा रतिक्रियाके कारण मेरुदण्डमें उपदाह ( बलि-फास ) समसके बाद स्रायविक अवसमतता । फोडाफुन्सी दब जानेकी वजइसे झूगी रोग ( सोरिनम सल्फर )।प्रत्येक बार हिलने-डोलने, हरेक बार देहको घुमाने पर मेरुदडमें दर्द, होता है। इरेक मोहरा ( कशेरुका) को छनेपर दर्द होता है।गर्भाशयवी स्थान चआू:ति; वय सखिकालके पहले , नौचेकी तरफ खिचावका दर्द करोब करोौब असच्य होता है ( ऐस्टिस-




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