एक और नचिकेता | Ek Aur Nachiketa

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Book Image : एक और नचिकेता  - Ek Aur Nachiketa
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जो बुरो त्तरह से घुन गये थे ।अगर मैं उठ सकता ता रग रगकर आगे बढता,हाथ! वह हाथ, जो इस बूढे को सहारा दे सकता थी यूढा शिल्मों सिसक पडा |(शायद उस स्मरण को मिटाने के लिएपोहने लगा सूखे हाथो सेझुरियों भरा अपना ललाट)अब में कुछ भी कर नहो सकता,फिर भीअगर रेंगता-लेगडाता अपनी शित्पशाला म जा बैठ पाता, तो निश्चय ही मेअपना छेदी और नपेनो का आनन्द लूटता |आकाश में लट्के औध चपक के समान हैं यहूत्ञाम्र कलश मण्डित मनोहर मदर,काली छकडो मे से उकेरा गयाजिसे अपने हाथो बनाया था मेने )जौर उन हाथो सेजिह मेंने स्वय छेनी पकडना पियलछाया,मेरे बच्चे नेउत्बोण किया, सुनह॒छे समुतत ध्वजस्तम्भ के ऊपर गरुड, कैसा उडता हुआ सा बैठा--लगता है ज्या उसके पे अब भी चचल हैं 1कहते हँ-मेंने उससे ईप्या वी !भला, यह बैसी बात |किस पिता का मन गव से पूल नही जायेगा,पुत्र वी प्रशसा सुतवर २हम बाँध सकते हैं हजारा घण्टो को जिह्नाएँबूटा शिक्पो




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