अंग सुत्तानी | Anga Suttani Part-iii

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Anga Suttani Part-iii by आचार्य तुलसी - Acharya Tulsi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्७ सुनक्षत्र और ऋषिदास--ये तीन अध्ययन प्राप्त है। प्रथम वर्ग में वारिषेण और अभय--ये दो अध्ययन प्राप्त हैं, अन्य अध्ययन प्राप्त नहीं हैं । विषय-वस्तु-- प्रस्तुत आगम में अनेक राजकुमारो तथा अन्य व्यक्तियों के वैभवपूर्ण और तपोमय जीवन का सुन्दर वर्णन है | धन्य अनगार के तपोमय जीवन और तप से कृश वने हुए शरीर का जो वर्णन है' वह साहित्य और तप दोनो दृष्टियो से महत्वपूर्ण है । रा ु पण्हावाग रणाइं नांस-बोघ ' ह प्रस्तुत आगम द्वादशाज्ली का दसवा अग है। समवायाग सूत्र और नदी मे इसका नाम 'पण्हावाग रणाइ' मिलता है! । स्थानाग मे इसका नाम 'पण्हावागरणदसाओ' है । समवायाग में 'पण्हावागरणदसासु-यह पाठ भी उपलब्ध है। इससे जाना जाता है कि समवायाग के अनुसार स्थानाग-निर्दिष्ट नाम भी सम्मत है । जयघवला मे 'पण्हवायरण' और तत्त्वार्थवा्तिक मे 'प्रश्नव्या- करणम्‌' नाम मिलता है । विषय-वस्तु ः प्रस्तुत आगम के विषय-वस्तु के बारे मे विभिन्‍न मत प्राप्त होते हैं। स्थानाग मे इसके दस अध्ययन वतलाए गए है---उपमा, सख्या, ऋषि-भाषित, जाचार्य-भाषित, महावीर-भाषित, क्षौमक प्रदन, कोमल प्रश्न, आदर्श प्रश्न, अग्रुष्ठ प्रइन और वाहु प्रइत । इनमे वर्णित विषय का सकेत अध्ययन के नामो से मिलता है । समवायाग और नदी के अनुसार प्रस्तुत आगम मे नाना प्रकार के प्रव्नो, विद्याओ और ५ फल ५ पंतालिस दिव्य-सवादो का वर्णन हैं! । नदीं मे इसके पेतालिस अध्ययनों का उल्लेख है | स्थानाग से उसकी १ (क) समवाओ, पहइुण्णयसमवाओ सूत्र &८। (ख) नदी, सूत्र ६० । २ ठाण १०११० । ३ (क) कसायपाहुड, भाग १ पृष्ठ १३१ पण्हवायरण णाम अग । (ख) तत्त्वाथंवातिक ११२०. प्रण्नव्याकरणम्‌ । ४ ठाण १०११६ पण्हावागरणदसाण दस अज्झयणा पण्णत्ता, त जहा--उवमा सखा, इसिभासियाइ, आयरियभासियाइ, महावीरभासियाइ, खोमगपसिणाइ, कोमलपसिणाइ, अद्वायपसिणाइ, मयृटुपसिणाइ बाहुपसिणाईं | ५ (क) समवाओं, पदण्णगसमवाओं सूत्र &८ पण्हावागरणेसु अद्ठुत्तर पस्िणसय अदठत्तर अपसिणसय अटूठत्तर पसिणापसिणय विज्जाइसया, नागसुवण्णहिं सद्धि दिव्वा सवाया आाघविज्जति । (ख) नदी, सूत्र ६० ।




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