घाघ और उनकी कहावतें | Ghagh Aur Unki Kahavaten

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
546 KB
कुल पष्ठ :
50
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)सात भ
न्दर क्छरच्छसपर व्दद्टर कौर
. हण छन्द रद ज्वरे 4
कदी मयेक्र दुक है चौर / |
घ्ाघा ठनच्छे गहरे बोर॥
ककंशा (झगड़ालू) स्वी, काटने वाला घोड़ा, चस
लेने लाला च्यायाघौश या मधिकारी कपे (घौढा देने वाला)
नित, चोरो करने वाला पुत्त-इन सवफो गहरे पानो में
डुबो देना चाहिए ! षयोकि ये सव समाज करे लिए कलंक ह ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...