संकीर्तन संगीत भाग 12 | Sankirtan Sangeet Bhag 12

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Sankirtan Sangeet Bhag 12 by रमाकान्त पाण्डेय - Ramakant Pandey

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ५) संक्रीतन सगीतनक कक क कत 1.1.11... तुलसी सो सव माति परमहित पूज्य प्राणते प्यारे ।लासो हेय सनेह राम पद ऐसो मतो हमारो ॥ ४ ॥& २-पूज्यपाद्‌ १० रश्रीखामी रामतीथंजी ` ® महाराज ®राम दीरथ छोड़कर घख़ार जय जाने लगे | ख्री के नयन छम छम नीर बरसाने लगे ॥ चस पत््रता ने स्वामी राम फे पाड गह] पकड़कर दामन पती का शब्द उसने ये कहे ॥। नाथ अपनी दीनदासी पर यह किरपा कीजिये । साथ रखकर बुभ मी सेवाका मौका दीजिए ॥ राम जव बनको गये थे साथ थी उनके सिया । श्राप मेरे राम हैं फिर कयों मुझे पीछे किया ॥ तब स्वामी राम तीथे ने कहा कुछ बात है। साथ ले जाना नहीं तुझे कि औरत जात टै ॥ तमको परसे और पिसर से और जूर से प्यार है । बस इसी कारण मेरी प्यारी मेरा इन्कार है ॥ तब कहा देवी ने जो छुछ है गयां देती हूँ मैं ! झापकें सदके मैं सारा धन जुटा देती हूँ मैं ॥ सम्पति को ए पति ! आतिश लभा देही हूं मैं ।




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