शंखनाद | Shankhanad

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutAanandiprasad Shrivastav
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1000 KB
कुल पष्ठ :
146
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about आनन्दिप्रसाद श्रीवास्तव - Aanandiprasad Shrivastav
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ सयमराय का सयमअनिल-मरइल मन्थित था हुआ,
गगन भी रज-गुम्फित था हुआ |पिशद-ब्यूह-समूह रे गये,
रण अनेक प्रकार मये नये।
प्रपर बुद्धि अनीपति व्यग्न थे,
बहु समुत्सुक चीर समश्र थे।हिविध थे द्ुफ्फेतन यों उडे,
मनुज़-नाशऊ-शासक ज्यों जुडे।चरणु-घात सहस्त सदृस्त थे,
बट सहस्न प्रचलित शस्त्र थे।कयस घर्षित द्व्य अजस्त थे,
अति घुम्ुक्तित पावक-अख थे।
रण का इग्रिता हुआ, दनादनबहु सख्यक तोप. छूटीं,धिपुज-शिरों के शुरुसागर पर
मंघों से विज्ञली हइटीं।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...