चौबीसी पुराण | Chaubisi Puran

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Chaubisi Puran by पन्नालाल साहित्याचार्य - Pannalal Sahityacharya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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# चौबीस तीर्थकर पुराण # २३ सानी था, वह अपने सामने किसीको कुछ भी नहीं समझता था। यहांतक कि पिता वगैरह गुरुजनोंकी मी आज्ञा नहीं मानता था। एक दिन इसके पिताने इसे कुछ आज्ञा दी जिसे न मानकर इसने पत्थरके खम्मेसे अपना सिर फोड़ लिया और उसकी व्यथासे मरकर यह खुअर हुआ है । यह बन्दर अपने पहले भवमें धान्य नगरके खुदता और कुबेर नामक वैश्य दम्पतिका नागदत्त नामसे प्रसिद्ध पुत्र था। घह बड़ा साथावी था, इस- का चित्त हमेशा छल कपद करनेसें लगा रहता था | किसी समय इसकी मांने अपनी छोदी लड़कीकी शादीके लिये दृकानमेंसे कुछ धन ले लिया जिसे यह देना नहीं चाहता था। इसने मांसे धन लेनेके लिये अनेक उपाय किये पर वे सब निष्फल हुए । अन्तमें इसी दुः/ल्से मरकर यह बन्दर हुआ है। और “घह नेवला भी पहले भसबमें सुप्रतिष्ठित नगरमें कादम्बिक नामका पुरुष था। कादम्बिक बहुत लोसो 'भा, किसी समय वहांके राजाने जिन सन्दिर बनवानेके कामपर इसे नियुक्त किया। सो यह ईंट लानेवाले पुरुषोंकों कुछ घन देकर बहुत कुछ ई दें अपने घर डलबाता जाता था। भाग्य 'बद किसी दिन कुछ ई टोंमें इसे सोनेड्की रालाकाएँ मिल गयीं जिससे इसका लोभ और मी अधिक बढ़ गया । कादम्बिककों एक दिन अपनी लड़कीकी सश्ुराल जाना || पह्य सो वह बढलेमें मन्दिरके कामपर अपने पुत्रकों नियुक्त कर गया था और | उससे कह भी गया था कि सौका पाकर कुछ ईटे अपने घरपर सिजवाते जाना परन्तु पुत्रने यह पापका काम नहीं किया । जब कादम्बिक लौडकर वापिस-आया और मालूम हुआ कि लड़केने हमारे कहे अनुसार घरपर ईटे नहीं डलवाई है तब उसने उसे खूब पीटा और साथमें 'यदि ये पंव न होते तो में लड़को . सखुराल भी न जाता! ऐसा सोचकर अयने पांव सो काठ लिये जब' राजाको इस बातका पता मिला तब उसने इसे खूब पिदवाया जिससे मर कर वह नेवला हुआ है। आज आपने जो छुझे आहार दिया है उसका वैसव देखनेसे इन सबको अपने पुजे भवोंका स्मरण हो गया है जिससे ये सब अपने कुकर्मोपर पश्चा- ताप कर रहे हैं। इन सबने आज पाजत्न दानक्की अनुमोदनसे विशष पुण्पका




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