चलन - कलन | Chalan Kalan

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutSudhakar Dvivedi
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
934 KB
कुल पष्ठ :
80
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about सुधाकर द्विवेदी - Sudhakar Dvivedi
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)साधारणफर्लों का सम्बन्ध । २१दूं अर से
(६) रज्कोछेय जब ते यज़्क््त्क्ता !
> तार __ ९१
(७/ एल्टड यु हाब अ .उक्ुउछूत .चार
(८) रजू-कोठ 'य त्वाय ता फ्क््क्त्क् 1
इन के शोक और दोदे विदार्थियों के भ्रभ्यासायथ छिसते दैँ।स्छोक । *
जीवया कोटिमौज्या च पएथक् चन्द्रो विभावितः।
आद्योडधनात्मकः फार्य्येस्सम्बन्धौ चापज्ञो ततः॥।दोद्दा ।
जीवाह्त जो रूप दो ऋण फार्मुकसम्पन्ध |
, कोटिज्याह्ृत रूप वा सो फामुंकसम्पन्ध.॥
कोक। कस
रूपी छेदनक्रोटिच्छेदनझत्या ह॒तावन्यः।
सधनस्वदा भवेतां चापमवी तत्र सम्बन्धी ॥
दोहा...
छेदनकऋतिहत रूप हो सोई 'चापसम्धन्ध।
ऋणकोटिच्छेदकृतिहन॒त एक द्योव सम्बन्ध ॥
श्शोक ।फोटिव्या स्पश्मक्ता या फोटिस्पशहतों गुणः 1
आणस्तदा मवेगं तौ सम्बन्धी चापन्नौ सदा ॥।५4,द्वोद्दा।
सपशेविद्नत शुग कोटि को सो दे घनुसम्दन्ध 1
कोटिस्पशे विमक्त वा ऋणनीवा सम्पन्ध 1
१५ | इस प्रकम में विद्यार्थियों को रद्ाहरण फे उत्तर झरने कोयुक्ति दियठाने के डिये कुछ उद्ाइरणों फा उत्तर निझ्ाठ कर फे
डिखते है ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...