चिरंजीवी | Chiranjivi

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Book Image : चिरंजीवी  - Chiranjivi
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हनु टूट, हनुमान नाम फिर- इसका यहाँ पड़ा था,लेकिन बालक सबके सम्मुख- निर्भय वहाँ खड़ा था,इतना तो है सत्य कि इनर्मे- अतुलित वल-विक्रम था,अन्य सभी से भिन्‍न घर पर- इनका जीवन क्रम था,इनकी गति थी पवन देव-सी-बुद्धि शारदा जैसी, इस भूतल पर कहीं दूसरी-शक्ति न दिखती वैसी, + + +बचपन से ही ऋषि-मुनियों के- सँग करते थे क्रीड़ा,खेल-खेल में उन सबको भी- दे देते थे पीड़ा,कभी किसी की कम्बल लेकर- यहाँ-वहाँ रख जाते,कभी किसी की गठरी लेकर- उसको ही ललचाते,




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