वेद - विद्या - निदर्शन | Veda - Vidya - Nidarshan
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
17.5 MB
कुल पष्ठ :
356
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)आदित्य श्३नथी। पर विज्ञाच के वणुन में श्रन्य संज्ञाद्मों के ज्ञान के साथ इस
बात के ध्यान में रखने का भी श्रचुमव होता गया | इस ग्रन्थ के शध्ययन
के लिए, निम्नलिखित बातें श्रावश्यक हैं--१. संस्कृत भाषा का ज्ञान ।२. वेद के आधिभोतिक श्रौर श्ाधिदेविक ग्रर्थो का ज्ञान ।३, इन झर्थों में सदायक वेदिक संज्ञाश्रों का ज्ञान ।४. वेंदिक-प्रक्रिया का ज्ञान ।
इसका थोड़ा सा परिचय इस ग्रन्थ से भी मिलेगा । तदथ॑
सम्पूर्ण ग्रन्थ का पाठ करना होगा । बीच-बीच मैं देखने से
समभ न श्राएगी ।५. बेद, ब्राह्मण श्रौर महाभारत, शान्ति पवें के सोच्तुधर्म का
निरन्तर पाठ । इस मोल्षुघमं में सृष्टि-विद्या का विस्तृत
उल्लेख है |६. पुराणों के सग॑ श्रौर प्रतिसग प्रकरणों का ज्ञान । पुराणों के इन
प्रकरणों में ्रति प्राचीन सामग्री सुरक्षित है ।विशेषताएँ--इस ग्रन्थ में अनेक ऐसे रदस्य हैं, लिन पर संसारभर के वैंज्ञानिकों को विचार करना पड़ेगा | ८०८०४ भूतों से प्रथक् नहीं,
एा8(67 श्र धप८एटूत प्रथकू नहीं, प्ण्8प८ के परमाणु हैं, ये जटिल
प्रश्न हैं ।” वायु, श्रग्नि: और श्राप: के परमाणु हैं, श्रौर ये ही
वास्तविक तत्त्व हैं । ये ही पप्टा८ण४, दा£टप०08 श्र ए८एएए005
के रूप में श्रब पुनः माने जा रहे हैं। भविष्य में यह तथ्य: सबको
ज्ञात हों जाएगा । पाश्चास्य बिज्ञान यह मद्दीं बता सका कि विद्यत्
के शुष्क (0०५पंए6) श्रौर श्राद्ध (०८8४८) रूप क्यों हैं । मद्दासूतोंकडनयापरयरलि तरल१. डा० श्राईन स्टाईन सहदा विचारक को कहना पड़ा--
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