आदर्श मुनि | Adarsh Muni

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Adarsh Muni by प्यारचन्द्र जी महाराज - Pyarchandra Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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डरे सर प्रीयुषर्षी तथा समयोपयोगी पचनों का सुधारस पान करने के लिये मध्य भारत के हिन्दूघमावटम्बी राजा, महाराजा और रईस लोग, दूर ९ से आप के पास समय ९ पर आते रहते हैं। आपके भाषणों की भाषा बोधगम्य, विश्वन्थुत्न के माप से भरी हुईं और चरलता लिये हुए बडी ही प्रमावश्ालिनी रहती है । बचत ऐसे ही अनेक कारणों से प्रेरित होकर और यह सोच कर, कि ऐसे महालुभाव सम्तों फी जीवनी यदि जनता के हाथ मे पहुचे तो पार्मिकता के साथ ? देश की उठती हुई अनेक कुरीतियों का निवारण भी सहज ही में हो सकता है। मैंने इस जीवनी को लिखने का अनुचित साहस किया है । और इसमें भापके समस्त विचार और सम्पूर्ण उपदेश नहीं, बहिक जीवन की मुख्य ? घटनाओं और आप के धार्मिक उपदेश्ों में च्यवहार के पुट का सूक्ष्म रूप में सम्ह कर दिया है। ऐसे महात्मा और प्रसिद्ध उपदेशक की जीवनी लिखने फो मध्य भारत के किसी भी घुरन्बर॒विद्वानू की लेखनी उठती हुई ने देख, मैंने ही यह अनधिकार चेष्टा की है, जिम्नमें मेरा र्वान्त सुखाय! है । क्या ही अच्छा होता यदि यह महत्काय मेरे जेते अत्पन्न द्वारा न होकर किसी और महाजुसाव के द्वारा सुप्तस्यज्ष शो कुछ सलन मेरी इस जनधिकार चेश का कारण जे




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