संक्षिप्त महाभारत | Sankshipt Mahabharat

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
58 MB
कुल पष्ठ :
958
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( २३ )पृष्ट-संख्या५०२-सकाम भक्तोंकी विभिन्न देवताओंके प्रति
भक्ति४०३-अन्तकालमें एकाक्षर ब्रह्म (प्रणव) का
उच्चारण करते हुए उसके अर्थरूप निर्मुण
भ्रह्मके चिन्तनसे परम गतिकी प्राप्ति४५०४-अनन्यभावसे चिन्तन करनेवाले भक्तके लिये
भगवान्की सुलमता ..४०४-राक्षसी (क्रोष), आसुरी (लोभ) और
मोहिनी (काम) प्रकृति एवं आसुरी सम्पदा-
से युक्त मनुष्य .५०६-ध्यानपूर्वक भगवान्के नाम-गुणोका कीर्तन
तथा उन्हें प्रणाम करनेवाले भक्त५०७-भगवानद्वारा निष्काममावसे नित्य-निरन्तर
चिन्तन करनेवाले अनन्य भक्तका योग-
क्षेमवहन५०८-मंगवान्का भक्तद्वारा प्रेमपूर्वक अपंण किये
हुए पत्र, पुष्प, फल और जलका भोग
लगाना५०९-भोजन, हवन, दान और तप आदिका
मगवानूकों अपंण५१०-परस्पर भगवत्तत्त्व बोध करानेवाले, प्रीति
पूर्वक भजन करनेवाले और भगवत्कथामे
लगे रहनेवाले भक्त .. ४५११-भगवत्तत्त्वके है वक्ता देवषि नारद,
असित, देवल और थ्यास श५१२-नक्षत्रोमें चन्द्रमा और ज्योतियोमे सूर्यरुपमे
भगवान्५१३-पुरोहितोमे बृहस्पति, सेनापतियोमे स्कन्द., और जलाशयोौमे समुद्रके रूपमे भगवान्५१४-महपियोमे भृयु, शब्दोमे ओकार, यज्ञोमें
जपयज्ञ और स्थावरोमे हिमालयके रूपमे
भगवान्५१५-दत्योमे प्र्माद, मृगोमे मृगेन्द्र और पक्षियोमे
गरुडके रूपसे भगवान् .५१६-शस्प्रधारियोमे श्रीरामके रूपमे भगवान्५१७-अर्जुनकी प्रार्थनासे भगवान्का पुनः सोम्य-
मूतिधारण५१८-निराकारके साधनम वलेशोकी बहुलता तया
अनन्यभावरो समुण भगवान्कों भजनेवाले
भवक््तोरा स्वय भगवान्द्वारा मृत्युरुप संसतार-समुद्से उद्धार५१९-जन्म, मृत्य, जरा और व्याधिस्प दुख४२०-सम्पूर क्षेत्रोमें एक ही आत्माका प्रकाश५२१-युणातीत महात्मा पुरुषइ्ररेश्२५६२५६२६६२७६२७६२७
६२८६२९
६२९श्रह३े०इ्रे४
६३५
६२६रेपृष्ट-संख्या५२२-आमसुरी सम्पत्तिसे युक्त मनुष्यता संग्रह कार्य
५२३-नरकके तीन द्वार--काम, क्रोध और सोम५२४-सात्तिक है 4008 देवारापना, राजसोरी
मद्ापूजा और तामासोंडी प्रेतोपासना
५२५-कायकलेशप्रद घोर तप . -५२६-सान्विक, राजन और तामस भोजन ..
५२७-मात्तविक, राजस और तामस यज्ञ,
५२८-तसात्त्विक, राजन और तामस दान
५२९-अर्जुनका मोह-नाश ..
३०-युधिप्ठिरका भीष्म आदिके पास युद्धके लिये
आज्ञा लेने जाना .. ब्ड
५३ १-युधिप्ठिरको भीष्मफा आशीर्वाद
५३२-युघिप्ठिरको द्रोणका आशीर्वाद
४३३-युधिप्ठिरको शपाचार्यका आशीर्वाद
५३४-युधिप्ठिरको द्ाल्यका आशीर्वाद
५३५-भीप्स और अरजजुनका युद्ध कर
५३६-घटोत्कच और अलम्बुपका युदढ_..
५३७-भीष्म ओर दवेतका युद्ध--भीपष्मने इवेतफी
इक्ति काट दी ग्ड
४३६५-दुर्पोघनका कौरव-वीरोंको संगठित होकर
युद्ध करनेके लिये उत्साहित करना ..
५३९-भीमसेनके हायसे कलिज्जराज भानुमान्
और उसके हाथीका वध *
५४०-दुर्पोधनका भीष्मजीको उत्तेजित करना . .
५४१-मंगवान् श्रीकृष्णणा चक्र लेकर भीष्मकों
मारनेके लिये दोड़ना .. क
५४२-भीमसेनके द्वारा हाथियोंका संहार
५४३-विजयी पाण्डवोका भीमसेत और घटोत्कच-
को भागे करके शिविरकी ओर लोटना . .
५४४-देवता और ऋषियोंका ब्रह्माजीसे मगवानुके
विपयमे जिज्ञासा करना
५४५-दुर्गोधनका भीष्मजीसे भगवान् इृष्णकी
उत्पत्ति और स्थितिके विषयमें पूछना
५४६-द्रोघाचार्यका कौरवोकों रणमूमिमे अचेत
अवस्थामे पढ़े देखना . है
५४७-भीमसेनक़े द्वारा दुर्पोधनकी पराजप
५४८-भीष्मका प्राणोकी बाजी सगाकर पाण्डवोसे
लडनेकी प्रतिज्ञा |
५४९-अधश्वत्यामा और शियष्डीता युद्ध
५५०-मकुल-सहदेवकी मारसे मूछित' दत्यका
मारथिके द्वारा युद्धक्षेत्रसे बाहर से जाया
जाना . ह६३२९
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