पद्म - पुराण भाग - 2 | Padm - Puran Bhag - 2

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
516
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
जन्म:-
20 सितंबर 1911, आँवल खेड़ा , आगरा, संयुक्त प्रांत, ब्रिटिश भारत (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत)
मृत्यु :-
2 जून 1990 (आयु 78 वर्ष) , हरिद्वार, भारत
अन्य नाम :-
श्री राम मत, गुरुदेव, वेदमूर्ति, आचार्य, युग ऋषि, तपोनिष्ठ, गुरुजी
आचार्य श्रीराम शर्मा जी को अखिल विश्व गायत्री परिवार (AWGP) के संस्थापक और संरक्षक के रूप में जाना जाता है |
गृहनगर :- आंवल खेड़ा , आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत
पत्नी :- भगवती देवी शर्मा
श्रीराम शर्मा (20 सितंबर 1911– 2 जून 1990) एक समाज सुधारक, एक दार्शनिक, और "ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार" के संस्थापक थे, जिसका मुख्यालय शांतिकुंज, हरिद्वार, भारत में है। उन्हें गायत्री प
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नवर्णन! में मानव के गर्भेवास और उसके क्रमेश: विकास का वर्णन
इस प्रकार किया गया है जिससे अनायास ही 'अध्ययतिमक भाव जागृत
हो जाता है। भारत वर्ष मे पर्वत और नदी” वाला- अध्याय -प्राज्ञीन
भूगोल की दृष्टि से निस्मन्देह बड़ा महत्वपूर्णा है ।- लेखक का झुकाव
किसी कारण वश नर्मदा नदी की तरफ सर्वाधिक हैं ॥ वह कहुता है--
/ परस्वती नदी का जल तीन दित में, यमुना जी का जल सात दिन.मे,
गंगा का जल तुरन्त पवित्र कर देता है, किन्तु चबेंदा का जल तो दर्शन
भात्र से ही पुनीत करने वाला है-।' कक ्
“वर्णाश्रम धर्म! “गृहस्य धर्म” “विष्णु भक्ति” /भगवाबू का
नाम साहात्म्य/ “प्रतिज्ञा पालन का महाफल' “वेष्णव के सक्षण
कआादि अनेक अध्याथो भे धर्म-व्यचहार, सदाचरण, जराध्यात्पिवाल्जीबन
आदि विपयो पर अच्छा प्रकाश डाला गया है। इस पुराण की लेखन
शैली अधिक स्पष्ट और बुद्धि सगति है, जिससे उसके उपदेशों का “प्रभाव
शीघ्र हृदयंगम होता है । यद्यपि पौराणिक शैली के अनुसार प्रत्येक
धर्मक्रिया और सदाचार का महत्व बढा-चढा कर बताया जाता है,जिसकी
अनेक व्यक्ति विपरीव आलोचना करते है । पर यदि सामान्य जत
समुदाय के बहुसंख्यक व्यक्ति उससे आकर्षित हीकर ही कुछ अशों में
धर्म मार्ग के अनुगामी बन सकें तो उसे उचित ही कहा जाथणा |...-+प्रकाशक
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