तीर्थकर वर्धमान महावीर | Tirathkar Vardhman Mahavir

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Tirathkar Vardhman Mahavir by पं. पद्मचन्द्र शास्त्री - Pt. Padam Chandra Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१९ महावीर-स्तवन : आशाधर सूरि (पदाकुलक राग) * सनन्‍्मति जिनपं सरसिज वदनं । संजनिताखिलकर्मकमथनं - ॥ पद्मसरोवर मध्य गतेद्ध । पावापुरि महावीर जिनेन्द्र ॥१1॥ पद्म० वीर भवोदधि पारोत्तार । मुक्ति श्रीवधु नगर विहारं ॥२॥ पद्म० द्विद्वदिशक तीर्थपवित्र । जन्माभिपक्ृत निर्मल मगातन्र ॥1३॥ पद्म० वर्धभाननामाख्य विशाल । मानप्रमाणलक्षण दशतालम्‌ ॥४।॥ पद्म० शत्रुविमधन विकट भठवीरं। इष्टैशवर्य धुरी कइूतदूरं ॥५॥ पद्म० कुंडलपुरि सिद्धार्थभपालं । तत्पत्नी प्रियकारिणि वाल 11६॥| पद्म० तत्कुलललिन विकाशित हुंस॑ । घातपुरोधातिक. विव्वंस 11७1 पद्म० ज्ञान - दिवाकरलोकालोक॑ । निर्जित कर्माराति विशोक॑ दा पद्म० बालत्वे संयमसुपालितं । मोहमहानलमथन विनीत॑ ॥९॥ पद्म०




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