शिक्षा निक्षेप पूर्व भाग | Shiksha Nikshep purav Bhag

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Shiksha Nikshep purav Bhag by खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शिक्षानिक्षिप | ( १५ )अच्छा आचरण करने करने से दूसरा अच्छा | उपदेश सुनने सुनाने से यह दोनों बड़ों को सदा- | काल चाहिये॥ ४० ॥राजा होय तो सब वस्तु अपनी हैं राजा से सब| धर्म हैं राजा न होय तो कोई किसी की वरतु नहीं | ठहरती है राजा के भय से सवे प्रजा अपनी मयों- | दामें रहती है राजाविना कोई किसी को नहीं | मानता है राजा की निंदा न करें राजनिंदा काबहुत भारा पाप है छोक मे भी हान राजानदा से| होती है॥ ४१ ॥नोकर मालक की बुराई न करे क्योंकि उस| के अन्न से शरीर पोषण होता है मालक की निंदा | करनेवाले कृतघ्र कह लाते हैं माठकने जो काम || बताया हो उस को त्तन मन से कर दिखावें नौकर 1 को इंषों आल्स्य ओर लोभ ये तीनों नहीं चाहिये || इन से दूर होकर नोकरी करे स्वच्छता से रहने ॥ वाला दक्षता से सब काम करनेवाढा माठकप्र | अनुरागी अहंभाव का त्यागी ऐसा नोकर मालकअच्छे भाग्य से मिलता है ॥ ४२॥नोकर में अजुरागीपना क्या है मालक की चिकन लेन न्‍ तप तन ल्‍रसरल्‍्+«<2र2 ब्न्_्ग्न्न्य स्व ञय --- ०>०------०-०-: - प -- 4२..




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