ज्ञाताधर्मकथांग सूत्र | Gyatadharmkathang Sutr

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Gyatadharmkathang Sutr  by मुनि श्री कन्हैयालालजी - Muni Shree Kanhaiyalalji
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
17 MB
कुल पृष्ठ :
612
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अनुत्तरोपपातिकसूत्र मे अभयवुमार के जैनदीक्षा लेने का उल्लेय है ।* बौद्धदीक्षा लेने का उल्लेख थेरा अपदान व येर गाथा की अट्गुकया में है। मज्किमनिकाय, सयुक्त निकाय आदि में उसक॑ जीवनप्रसग हैं ।राजगृहप्रथम अध्ययन में राजगृह नगर का भी उल्लेख है जहा पर भगवान्‌ महावीर न॑ अनेक चातुर्मास किये कि और दो सौ से भी अधिक बार उनके वहाँ समवसरण लगे थे ।५ राजगृह नगर को प्रत्यक्ष देवलोकभूत व अलकापुरी उद॒श कहा है ।” तथागत बुद्ध भी भनेक वार राजगृह मे थाए थे। उहोने अपने धमप्रचार का केद्व बनाने का भी प्रयास किया था । भगवान महावीर गुणशील, मण्डिकुच्छ और मुदगरपाणि आदि उद्यातों मे ठहरा करते थे, 5 जबकि बुद्ध गंद्धयूट पदत, कलदकनिवाप और वेणुवन मे ठहरते थे 1 राजगृह नगर झौर उसवे' सन्निकठ नारद ग्राम * कुक्कुटाराम विहार, '* गध्नकूट पहाडी यप्टिवन,** उरझविल्वग्राम प्रभासवन*३ आदि बुद्ध धम से सम्बीघत थे। राजगह में एक बौद्ध-सगीति हुई थी 1९४ जब बिम्बसार बुद्ध का अनुयायी था तब बुद्ध ने राजगह से वैशाली जाने की इच्छा व्यक्त की । तब राजा ने बुद्ध वे लिए सडक बनवायी और राजगह से गया तक की भूमि को समतल करवाया 1९४राजगृह के प्राचीन नाम गिरिब्रत, वसुमती * बराहद्रथपुरी*? मगधपुर ः बराह, वृषभ, ऋषिगिरि१ श्षनुत्तरीपपातिक १-१० २ खुहकनिकाय खण्ड ७ नालदा, भिक्षुजगदीश कश्यप ३ मज्मिमनिकाय ७६ ४ सयुक्तनिकाय ५ बल्पयूव ५०१२३ (क) व्यास्याप्रज्ञप्ति ७८४, ५-९, २-५ (ख) भावश्यक ४७३/४९२/५१८ ६ भगवान महावीर एक अनुशीलन पृ २४१०-४३ ७ परच्चक्ख देवलोगभूआ एवं मलकापुरीसवासा | ८ (क) ज्ञाताधमकथा पृ ४७, (ख) दशाश्रुतस्कध १०९ पृ ३६४ (ग) उपासकदणा ८, प्र ५१ ९ मज्किमनिकाय सारनाथ पू २३४ (ख) मज्किमनिकाय चलसकलोदायी सुत्तत पृ ३०५ १० नेपालीज बुद्धिस्ट लिटरेचर पृ ४४५ ११ वही पृ ९-१० १२ महावस्तु ४४१ १३ नेपालीज बुद्धिस्ट लिट्रेचर पृ १६६ १८४ चुल्लवग्ग १श्वा साधक १४ घम्मपद वामेट्री ४३९-४० १६ रामायण १/३२/७ १७ महाभारत २४ से ४४ १८ चही २०-३० रर




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