ध्वनि और संगीत | Dhawani Aur Sangeet

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Book Image : ध्वनि और संगीत  - Dhawani Aur Sangeet
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तरंग और वंग श्५ससधनता की दशा ३ से ६ तक पहुँचती है । अब तीसरी परक्तिका पहछीके साथ दसनेपर माटूम होगा कि ० और ३ के बीचक अणु एशन्ट्सरेसे दुर-दूरपर हू । इस प्रकार यहाँ 'विरछता/ पैदा हो गया ह 1 चोयी पवितर्स सघनता' ६ से ९ तक पहुँची हू और 'विरलता ० से ६ तब । पाचवी पकियमें सघनता ९ सर १३ हक और विरल्ता हे से ९ तक फल गयी है । इस अक्र ० के एक पूरे कम्पनम सधनंता १२ तक पहुँच ययो और अणु १२ अब ठीक ० की दाम कम्पस आरम्म करनवों तथार है। इससे आंग्र ० दूमरो सघनता और १२ अपना पहली सघनता पटा करगा $पाँचवी पक्तिस यह स्पष्ट हू कि सघनताक पाछ विरलता लगा रहती हूं । इस एक सघनता और एक विरल्ताको मिल्यकर एवं अनुलर्ध्ध तरय मानों जाती ह--ठोक उसी प्रकार जैसे एक उमार और एक खाल मिलकर एक अनुप्रस्थ तरग बनती हू ! यदि सघनताकी मात्राकों उभारसे और विरल्ताकी मात्राको साल्स प्रकट करें ता दाना प्रक्ारक्ी तरगें एक हो सप रू ऐती हू । इसलिए अनुदेध्य तरग नी आ० १० क वक़्त हो प्रकट की जा सकती हू। यहाँपर एक सघनता आर एक विरखतात यायकी दूरी ता वरगमान हागी और पहली पकित ( जा० ११) को अप्ला अच्तिम सधनता जितनो अधिक होगी वहों तरभ विस्तार होगी ।अनुप्रस्य तरगको तरह ही, अयर तरगमान माल्म हो और अणुआाकी आवृत्ति मोम हा ता अनुःध्य तरगका क्य भी निहशाला जा सकता हू ।१७ बनुच्छेट ११ मं आवत्तिका सम्बंध वस्तुक आवकार-प्रवारदे साथ टिखामा गया ह और यहा आवृत्तिका सम्बब तरगवग और तरग मानक साथ टिखाया गया है । विचार क्रनेपर पता चलेशा कि इन दोना बातें काई भेट नो है ॥ उदाहरणक लिए त्तारका आहउत्तिकों लें । यह्‌ बताया जा चुका ह कि तारको आवृत्ति उसकी रूम्दाई, खिचान और तौड- पर विभर हू । मश हम्बाईका सम्बंध तरगमानस ह और खिंचाव श्रछोलका सम्बय तरगबगस हू । दिचाव जितना अधिक और सौरू जितना डे




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