ब्रह्मचर्य क्या है | Brahmacharya Kya Hai

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(४ अ जना मैं सद्दायता देते हैं । उनके नहीं किन्तु थपने ्ानन्द और गर्य के लिये इस श्रपने बच्चों के शुड॒डों के से फपड़े पदनाते हैं 1 मैंने वीसियों बच्चों का पालन-पोषण किया है । घर नो भी कपड़े उन्हें दिये बिना कठिनाई के वे उन्हों को पहनने लगे और खुश हुए। हम उन्हें इर श्रकार का सर्म शर उत्तेजक खाना खिलाते हैं। हमारा भंधा स्नेह उनकी चमता फा ख्यात दी नहीं करता । निस्सन्देद फल यदद होता. है कि जरदी जवानी या जाती है पधकचरे वच्चे पैदा होते हैं और जल्दी ही मर जाते हैं । पिता-माता धपने फा्मों से ऐसा नीता-नागता सबक . देखे हैं जिसे वच्चे थासानी से समक लेते हैं । विपयभोग में शुरी तरह ब्यूर रहकर थे अपने बच्चों के लिये चेरोक दुराचार के मसूने का काम देते हैं । कुटुम्ब को प्रस्पेक झुसमय इृद्धि का बाजेनताने खुशियों और दावतों के साथ स्वागत किया जाता है । श्रारचयें तो यद है कि ऐसे चायुर्मदल के हैते हुए दम इससे भी कम संयमो क्यों नहीं हैं । मुम्हे इसमें सन्देद की मालक भी नहीं है कि यदि विवादित पुरुप थपने देश का भला चाहते हैं और भारत के बलवान रूपवाद शर सुडौज खो- । पुरपों का राष्ट्र घनाना चाइते हैं तो थे पूर्ण झास्मर्सपम का पालन करें और फिलहाल बच्चे पैदा करना बन्द फार दें । जिनका नया विवाद हुआ है उन्दें भी में यही सलाद दू्। किसी यादें के न फरना उसके करके छोड़ने से. ्ासान है। जन्म शसब से निलिंप [ बना रदना रफ शराबी के शराब छोड़ने की ्रपे्ा फ्ों घासान है । | जड़ा रहना मिस्कर उठने की थपेत्ता कहीं थधिक आसान है । यह । फइना सिय्या है कि संयम उन्दों के मली सरद समस्या जा सकत है जा विपयभोग से अघा गये हैं। निं्त मजुप्य के भी संयम सिखाने




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