अलबेरूनी का भारत | Alaberuni Ka Bharat

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Alaberuni Ka Bharat by श्री सन्तराम - Shri Santram

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(७) सकते हैं क्योंकि एक सत्यपिय भार परम सुशिक्तित मनुष्य इनक पूर्वजों की तत्कालीन सभ्यता का चित्र छोड़ गया है | पुस्तक की घहुत सी बातें के साध वे सहमत न हंगे इसकी कई टीक्ा-टिप्प- शियां से उनके हृदयों को ठेस लगेगी परन्तु उन्हें यदद स्वीकार करना पड़ेगा कि उसका उद्देश्य ऐतिहासिक तथ्यों को जानना शरीर रहें उनके यथार्थ रूप में प्रकट करना हे । उन्हें इस बात को भी भूक नददीं जाना चाहिए कि कई अन्य स्थलों पर इससे मुक्तकण्ठ से दतकी प्रशंसा भी की है । पुस्तक कव शरीर कहाँ लिखी गईं । जिस समय श्रलबेरूनी ने यद्द पुस्तक लिखी उस समय इसका ._ सम्राट मददमूद--जिसने बससे (संवत्‌ ४०८ दिजरी की बसन्त ऋतु में ) मध्य एशिया में स्थित उसकी प्यारी जन्म-भूमि छुड़ा कर उसे श्रफृग्रानिस्तान में ला बसाया था--इस लोक में न था -] उसकी सृस्यु २३ वीं रबी द्वितीय संवतत ४२१ दिजरी तदनुसार भूहस्पतिवार ३० एप्रिल १०३० ई० को दो चुकी थी | पुस्तक के इस्तलेख पर अरबी में एक नोट लिखा है जिससे ज्ञात होता है कि अलबेरूनी ने उसे ग़ज़नी नगरी में पहली मुददरंम ४२३ हिजरी सबचुसार २-८ दिसम्बर १०३१ ई० को भर्थात्‌ महमूद की सत्यु के डेढ़ वष घाद समाप्त किया था । इसलिए यह पुस्तक निश्चय दी ३० एप्रिल १०३० ई० और रे दिसम्बर के बीच में किसी समय लिखी गई दागी । श्रान्तरिक प्रमाणों से यद्द सिद्ध दाता है कि पुस्तक ३० एप्रिह श्र ३० सितस्थ्रर १०३० ईं० के बीच में कभी लिखी गई थी । आश्चर्य्य है कि इतने थोड़े समय में ऐसी विरत भौर ब्यापक पुस्तक फेसे क्तिख ली गई इसके कई भाग पहले से शी सके




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