माया लोक | Maya Lok

Maya Lok by कृष्ण बलदेव वैद - Krishn Baladev Vaid

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मैं उसको अपने काम की रिपोर्ट दे रहा था और नहीं जानता था कि वह कौन था और मैं अपने किस काम की रिपोर्ट उसे क्यों दे रहा थ। मैंने कोई तैयारी नहीं की थी। मुझे अपने मुंह से फूट रही बातों पर विस्मय भी हो रहा था अविश्वास भी। महसूस हो रहा था जैसे मुह किसी का हो आवाज़ मेरी हो बातें किसी और की। जो शख्स मेरी रिपोर्ट सुन रहा था उसकी सूरत मुझे दिखायी नहीं दे रही थी। उस पर काला पर्दा सा टंगा हुआ था। वह एक खम्बे की तरह मेरे सामने खड़ा था। जो रिपोर्ट मेरे मुंह से निकल रही थी उसका सार अब मुझे इस तरह से याद आ रहा है मेरा काम अधूरा है। मेरा इसमें कोई दोष नहीं। मेरे अधूरे काम में कई दोष हैं। मैं कभी उसे पूरा कर सकूंगा न उसके दोषों को दूर। लेकिन मैं उसे पूरा करने की कोशिशों से बाज़ आऊँगा न उसके दोषों को दूर करने की कोशिशों से। मैं शेखी नहीं बघार रहा। मेरे इस दावे पर किसी को यकीन नहीं आएगा। मुझे खुद नहीं आ रहा। मेरी कोशिशें भी अधूरी हैं उनमें भी कई दोष हैं। मैं उन्हें पूरा करने की कोशिशों से बाज़ आऊँगा न उनके दोषों को दूर करने की कोशिशों से । मैं शेखी नहीं बघार रहा। मेरे इस दावे पर भी किसी को यक़ोन नहीं आएगा। मैं इस सिलसिले को आगे नहीं बढ़ाऊंगा। मुझे उम्मीद है कि यह सुनने वाले के मन में अपने आप आगे बढ़ता चला जाएगा--अन्त तक या अनन्त तक। मैं अपनी अधूरो कोशिशों से बाज़ आ जाना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कोई मेरी अधूरी कोशिशों का अन्त कर दे। मेरे अन्त से पहले। मेरा अन्त अब दूर नहीं। मैं चाहता हूं कि कोई मेरे चाहने का अन्त कर दे। मेरी यह ख्वाहिश मेरी रिपोर्ट में शामिल नहीं होनी चाहिए। मैं चाहता हूं कि कोई मेरी ख्वाहिशों का अन्त कर दे। मैं जानता हूं कि मेरी यह ख्वाहिश कभी पूरी नहों होगी। मैं कुछ नहीं जानता। मैं इस चक्कर मे पहले भी कई बार फंस चुका हृं। मैं शुरू से हो इसी चक्कर में फंसा हुआ हूं। सब इमी चक्कर में फंसे हुए हैं वे जानें या न जानें । इस खयाल से मुझे कोई राहत नहीं मिलती । शायद इसीलिए मेरा काम मुझे अधूरा नज़र आता है उसमें मुझे कई दोष नज़र आते हैं उसे पूरा करने की और उसके दोषों को दूर करने की अपनी सारी कोशिशें मुझे अधूरी नजर आती हैं....। इसे ही मेरी रिपोर्ट समझ लिया जाए मेरी अधूरी रिपोर्ट वह खम्बा यकायक ग़ायब हो गया तो मै मुस्कराया। वह मुस्कराहट एक पुरस्कार सरीखी थी जो मैंने अपने आपको दे दिया थ्रा। कुछ दूर निकल जाने के बाद मुझे कुछ लोग दिखायी 16. माया लोक




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